नसीम खान
सांची,,,नगर के बस स्टैंड परिसर से लगे क्षेत्र में विकासखंड स्तरीय पशु चिकित्सालय संचालित होने के बावजूद घायल और बीमार पशुओं को उपचार नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि पशु चिकित्सालय से कुछ ही मीटर की दूरी पर एक घायल पशु लंबे समय से लंगड़ाता हुआ घूम रहा है। पैर में गंभीर चोट के कारण वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा है, लेकिन उसकी ओर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं पहुंचना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, बेजुबान पशुओं के बीमार अथवा घायल होने पर उनके उपचार के लिए शासन द्वारा पशु चिकित्सालयों में पशु चिकित्सक एवं कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इनके वेतन और अन्य व्यवस्थाओं पर शासन द्वारा राशि खर्च की जाती है, ताकि पशुओं को समय पर उपचार मिल सके। इसके बावजूद नगर में घायल पशुओं की स्थिति यह बताती है कि उपचार व्यवस्था जरूरतमंद पशुओं तक कितनी पहुंच पा रही है, इस पर निगरानी की आवश्यकता है।
इन दिनों नगर में बड़ी संख्या में आवारा पशुओं का जमावड़ा देखा जा रहा है। इनमें कई पशु वाहनों की चपेट में आकर घायल होने के बाद इधर-उधर भटकते दिखाई देते हैं। ऐसे बेसहारा पशुओं को अस्पताल तक पहुंचाने वाला कोई नहीं होता। यही वजह है कि घायल पशुओं के उपचार की जिम्मेदारी संबंधित विभाग पर और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
बताया जाता है कि शासन द्वारा घायल पशुओं को चिकित्सालय तक पहुंचाने के लिए पशु एम्बुलेंस की व्यवस्था भी की गई है। लेकिन नगर में घायल पशुओं को इस सुविधा का लाभ मिलता दिखाई नहीं देना भी सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि यदि पशु चिकित्सालय के आसपास ही घायल पशु उपचार के अभाव में घूमते रहें तो शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई व्यवस्थाओं की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बस स्टैंड परिसर में घूम रहा घायल पशु इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। पैर में चोट के कारण वह ठीक से चल नहीं पा रहा है और लंबे समय से पीड़ा झेल रहा है। बेजुबान होने के कारण वह अपनी तकलीफ किसी से कह भी नहीं सकता। ऐसे में पशु चिकित्सालय की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि आसपास मौजूद घायल पशुओं की स्थिति पर ध्यान देकर उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए।
बेजुबान की पीड़ा आखिर कौन सुनेगा?
पशुओं के उपचार और देखरेख के लिए शासन द्वारा चिकित्सालय, चिकित्सक, कर्मचारी और एम्बुलेंस जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके बावजूद यदि चिकित्सालय के चंद कदमों की दूरी पर घायल पशु उपचार के अभाव में भटकता रहे तो यह व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार इस घायल पशु की सुध लेकर उसे उपचार दिलाते हैं या फिर वह इसी तरह अपनी पीड़ा के साथ भटकता रहेगा।





