समय से पहले मानसून की दस्तक, बारिश की प्रशासन तैयारियों से नदारद ।

नसीमखान
सांची,,
शहर में मानसून ने इस वर्ष समय से पहले ही दस्तक दे दी है। रोजाना उमड़ते-घुमड़ते बादल और रुक-रुक कर हो रही बारिश ने गर्मी से राहत तो दी है, लेकिन इससे उत्पन्न समस्याएं स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर रही हैं। सुबह से बढ़ता तापमान दोपहर बाद बारिश के साथ नमी में बदल रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि मानसून ने निर्धारित समय से पूर्व ही नगर में प्रवेश कर लिया है।
बारिश की आमद से पूर्व आमतौर पर सभी सरकारी विभागों द्वारा तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया जाता है। विद्युत मंडल ने अपनी ओर से बिजली लाइनों की मरम्मत और झाड़ियों की कटाई जैसे कार्य आरंभ कर दिए हैं। लेकिन इसके विपरीत, स्थानीय प्रशासन अब तक नींद में दिखाई दे रहा है।
शहर की सड़कों पर जलजमाव और जगह-जगह बने गड्ढों में पानी भरने लगा है, जिससे दलदली स्थिति पैदा हो गई है। इससे न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि आम नागरिकों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हाल ही में नगर में बारिश के पानी की निकासी के लिए करोड़ों रुपये की लागत से नाले का निर्माण कार्य आरंभ किया गया था, लेकिन वह भी अब अधर में लटक गया है। निर्माण एजेंसी काम अधूरा छोड़कर गायब हो गई है। नाले की अधूरी खुदाई से मिट्टी सड़कों पर फैल गई है, जिससे फिसलन और कीचड़ ने राहगीरों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
नगर के निचले इलाकों में जलभराव की पुरानी समस्या इस अधूरे निर्माण के चलते इस बार और विकराल रूप ले सकती है। इसके अलावा, सड़क किनारे की दुकानों में बारिश का पानी घुसने की आशंका भी बढ़ गई है, जिससे स्थानीय व्यापारियों के धंधे पर संकट मंडरा रहा है।
हालांकि नागरिकों द्वारा समय-समय पर प्रशासन को चेताया गया, फिर भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे यह साफ झलकता है कि प्रशासन केवल तमाशबीन बना बैठा है बारिश लगभग आ ही रही है तब न तो नगर भर मे कहीं कोई सफाई व्यवस्था न ही बारिश के पानी निकासी व्यवस्था के साथ न ही सडको पर फैली मिट्टी हटाने की व्यवस्था ही जुटाई जा सकी है इसके साथ ही न ही नगर में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की ही सुध लेने की फुर्सत मिल सकी है।तब इन हालात में शहरवासी आने वाली मुश्किलों से खुद ही निपटने को मजबूर हैं।
इस मानसून में यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो नगर की स्थिति और भी भयावह हो सकती है। प्रशासन की यह उदासीनता शहर को भारी परेशानी में डाल सकती है।

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