सांची में बिजली व्यवस्था बदहाल: तार के स्थान पर बिछाई गई केबलें बन रहीं हादसों का कारण ।वरिष्ठ अधिकारी मौन, कनिष्ठों पर निर्भरता से बिगड़ता जा रहा सिस्टम।

नसीमखान

सांची ,,,
विश्व धरोहर स्थल सांची, जो अपनी ऐतिहासिक महत्ता और अंतरराष्ट्रीय पहचान के चलते देश-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित करता है, आज बिजली संकट की मार झेल रहा है। नगर में विद्युत तारों को हटाकर खुले में केबलें बिछाई गई थीं, जिससे बेहतर आपूर्ति और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके,

लेकिन आज यही केबलें खतरे का कारण बन चुकी हैं।

तार के स्थान पर बिछाई गई केबलें बनीं संकट का कारण ।
विवि कंपनी लिमिटेड द्वारा करोड़ों रुपए की लागत से पुरानी तार व्यवस्था हटाकर नई ओपन केबलें लगाई गईं थीं। दावा था कि इससे बिजली आपूर्ति मजबूत होगी, मगर हकीकत इसके ठीक उलट निकली। घटिया गुणवत्ता की केबलें हल्की हवा में ही टूटने लगती हैं, तो कभी चिंगारी छोड़ते हुए आग का रूप ले लेती हैं। कई बार ये केबलें जमीन पर गिर चुकी हैं, जिससे बड़ी दुर्घटनाएं होते-होते बची हैं।

कर्मचारियों की लापरवाही और अधिकारियों की उदासीनता ।

नगरवासियों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बाद भी वरिष्ठ अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठाते। वे अपने कनिष्ठ अधिकारियों की रिपोर्ट पर ही निर्भर रहते हैं। जनता की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन प्रशासन सिर्फ कागज़ी कार्यवाही तक सीमित है।
नियामक आयोग के आदेशों की उड़ाई जा रही धज्जियाँ ।

विद्युत नियामक आयोग ने सांची की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए कई साल पहले 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के निर्देश जारी किए थे। पर आज तक इन आदेशों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया। हालात यह हैं कि कभी भी बिजली चली जाती है और यह नहीं कहा जा सकता कि कब लौटेगी।

पर्यटकों की सुरक्षा और नगर की प्रतिष्ठा पर संकट

सांची जैसे ऐतिहासिक स्थल पर लगातार बिजली की आंखमिचौली से न केवल स्थानीय जनजीवन अस्त-व्यस्त है, बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। नेटवर्किंग सेवाएं ठप हो जाती हैं, जिससे संचार साधन और बैंकिंग व्यवस्था भी रुक जाती है।

पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ता है असर

बिजली पर आधारित नगर की पेयजल व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा जाती है। बिजली जाते ही शहर में पानी की सप्लाई बंद हो जाती है, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

बरसात के पहले हर बार दोहराई जाती है लीपापोती

हर वर्ष बारिश से पूर्व लाखों रुपये खर्च कर बिजली व्यवस्था सुधारने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जैसे ही मौसम करवट लेता है, बिजली घंटों तक गायब हो जाती है। यही सिलसिला वर्षों से चल रहा है।
सांची जैसा ऐतिहासिक नगर लापरवाही और अव्यवस्था का शिकार होता जा रहा है। बिजली व्यवस्था में सुधार को लेकर न तो कोई गंभीर प्रयास दिखते हैं, न ही कोई जवाबदेही तय की जाती है। यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारी और कंपनी सचेत नहीं हुए, तो यह गौरवशाली स्थल बदनामी की गर्त में चला जाएगा।

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