“सांची: विश्व प्रसिद्ध धरोहर स्थल अब भी बस स्टैंड के इंतज़ार में”बसस्टैंड विहीन पर्यटक स्थल।

नसीमखान
सांची,,
विश्व धरोहर की सूची में शुमार ऐतिहासिक स्थल सांची अपनी बौद्ध स्थापत्य कला, ऐतिहासिकता और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। देश-विदेश से हजारों पर्यटक यहां प्रतिवर्ष आते हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल पर आज तक एक सुसंगठित बस स्टैंड तक उपलब्ध नहीं हो सका है।
सांची का नाम जब लिया जाता है, तो बुद्धकालीन स्तूपों, शांति, दर्शन और इतिहास की गहराई को सामने रखा जाता है। करोड़ों रुपए इस स्थल के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास पर खर्च किए गए हैं, फिर भी बुनियादी ढांचे की दृष्टि से एक साधारण सुविधा — बस स्टैंड — अब भी यहां नदारद है।
अतिक्रमण की भेंट चढ़ा बस स्टैंड।
विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के कार्यकाल में एक बार बस स्टैंड का निर्माण अवश्य हुआ था और कुछ समय तक वहां से बस सेवाएं भी चालू रहीं। परंतु धीरे-धीरे अतिक्रमण के चलते वह बस स्टैंड उपयोगहीन होता चला गया। अब हालात यह हैं कि बस चालक वहां बस ले जाना भी पसंद नहीं करते।
परिणामस्वरूप, बसों का ठहराव अब मुख्य चौराहे पर होता है, जो कि राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा है और अत्यधिक ट्रैफिक से ग्रसित रहता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह क्षेत्र पुलिस विहीन बना हुआ है, जिससे पर्यटकों की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े हो जाते हैं।
पर्यटक हो रहे हैं परेशान।
सांची आने वाले देशी और विदेशी पर्यटक जब यहां पहुंचते हैं, तो सबसे पहले बस स्टैंड की तलाश करते हैं। स्थानीय लोग उन्हें पुराने बस स्टैंड का रास्ता दिखा भी देते हैं, लेकिन वहां बस न पाकर पर्यटक इधर-उधर भटकते रहते हैं। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि सांची जैसे ऐतिहासिक पर्यटन स्थल की छवि को भी धूमिल करती है।
प्रशासन और शासन का उदासीन रवैया।
कई वर्षों से इस मुद्दे को लेकर न तो स्थानीय प्रशासन और न ही राज्य शासन की कोई गंभीर पहल देखी गई है। ऐसा लगता है कि करोड़ों के विकास कार्यों के बावजूद, पर्यटन की रीढ़ कहे जाने वाले यातायात प्रबंधन को नजरअंदाज किया जा रहा है।
जरूरत है ठोस पहल की।
अब समय आ गया है कि शासन-प्रशासन इस दिशा में तुरंत संज्ञान ले और सांची में एक सुव्यवस्थित, यात्री सुविधाओं से युक्त बस स्टैंड का निर्माण करे। यह न केवल स्थानीय जनता और पर्यटकों की सुविधा का विषय है, बल्कि सांची की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक है।
सांची जैसे विश्व धरोहर स्थल को “बस स्टैंड विहीन स्थल” के रूप में नहीं जाना जाना चाहिए। शासन-प्रशासन यदि वास्तव में पर्यटन को बढ़ावा देना चाहता है, तो सबसे पहले आधारभूत ढांचे की जरूरतों को पूरा करे।

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