स्वच्छता के खोखले दावे गंदगी से जूझता ऐतिहासिक सांची नगर परेशानी से जद्दोजहद करते लोग

नसीमखान सांची

सांची,,
एक ओर स्वच्छता अभियान के बड़े-बड़े दावे और रैलियों के जरिए जागरूकता फैलाने के प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी ओर सांची नगर के अधिकांश क्षेत्र आज भी गंदगी की चपेट में हैं। स्वच्छता का यह अभियान अब तक केवल कागजों और नारों तक सीमित दिखाई देता है। परिणामस्वरूप नगरवासी गंदगी से उत्पन्न बीमारियों की जद में आने को विवश हैं।
जानकारी के अनुसार, सांची की ऐतिहासिक और पर्यटन दृष्टि से महत्ता को देखते हुए नगर को सुंदर और स्वच्छ बनाने के लिए शासन-प्रशासन द्वारा कई वर्षों से करोड़ों रुपये व्यय किए जा चुके हैं। अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्कूली बच्चों की रैलियाँ निकालकर स्वच्छता के संदेश दिए जाते रहे हैं, किंतु धरातल पर स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है।
नगर के अनेक क्षेत्रों में नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बहता दिखाई दे जाता है, कहीं कहीं कचरे के ढेर भी खुलेआम पड़े दिखाई दे जाते है और सफाई के लिए गंभीर होने की जरुरत मेहसूस की जा रही हैं सफाईकर्मियों की लंबी फौज और दर्जनों वाहनों की उपलब्धता के बावजूद नगर की स्वच्छता केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि— “नगर में कुछ क्षेत्रों को सफाई की दरकार बनी हुई है ,आज भी स्वच्छता की दरकार है तथा शिकायतें करने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।”
इस गंदगी से मच्छरों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
नगर परिषद की 15 सदस्यीय परिषद में जहाँ 14 पार्षद सत्तारूढ़ दल से हैं और एक पार्षद विपक्ष का है, वहाँ पूर्ण बहुमत के बावजूद स्वच्छता और विकास का आज भी लोगों को इंतजार है विकास के लिए प्रशासन को गंभीरता से इस ओर ध्यान देने की जरुरत है योजनाएँ धरातल पर उतरने का इंतजार कर रही हैं , जबकि नागरिक अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्षरत हैं।
नागरिकों की अपेक्षा है कि
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से अपेक्षा जताई है कि नगर में गंदगी स्थलों की सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, गंदगी फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और स्थायी समाधान के लिए नालियों एवं कचरा निस्तारण व्यवस्था में ठोस सुधार किए जाएँ। साथ ही नागरिकों ने अपील की है कि सांची जैसे ऐतिहासिक नगर की गरिमा बनाए रखने के लिए “स्वच्छता” को केवल प्रचार नहीं, बल्कि प्राथमिक जिम्मेदारी बनाया जा सके।

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