नसीमखान
सांची ,,,
जानकारी के अनुसार शासन और प्रशासन जहां आमजन को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के दावे करते नहीं थकते, वहीं ज़मीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। विश्वविख्यात बौद्ध पर्यटन स्थल सांची में बिजली, पानी जैसी बुनियादी आवश्यकताओं का बुरा हाल है। शहरवासी समस्याओं से त्रस्त हैं, परंतु जिम्मेदार अधिकारी कुर्सियों से चिपके बैठे हैं।
बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त
बिजली विभाग की मनमानी चरम पर है। एक ओर उपभोक्ताओं से मनचाहा बिल वसूला जा रहा है, दूसरी ओर बिजली आपूर्ति का कोई निश्चित समय नहीं है। आए दिन अघोषित कटौती हो रही है। भीषण गर्मी में तापमान 35 डिग्री के पार जा चुका है, लेकिन न तो अधिकारियों को इसकी चिंता है और न ही कोई समाधान की दिशा में प्रयास दिखाई दे रहा है। विभागीय कर्मचारी एसी कमरों में आराम फरमा रहे हैं, जबकि आमजन त्राहि-त्राहि कर रहा है।
पेयजल आपूर्ति चरमराई, दो दिन में एक बार सप्लाई ।
जलस्तर में गिरावट के चलते नगर प्रशासन ने दो दिन में एक बार जलापूर्ति करने का निर्णय लिया, लेकिन यह व्यवस्था भी नाममात्र की साबित हो रही है। कई मोहल्लों में सप्लाई कब होगी, कोई तय नहीं। लोग पानी के लिए घंटों इंतज़ार कर रहे हैं। पहाड़ी इलाकों में स्थिति और भी विकट है। इतना ही नहीं इस ऐतिहासिक स्थल पर अधिकारी कर्मचारियों की मेहरबानी से नगर भर में सैकड़ों अवैध नलकनेक्शनो की भरमार का मामला भी सामने आ चुका था तब ततकालीन सीएमओ ने स्वीकार करते हुए कहा था कि हमनें नौसौ अवैध कनेक्शनो मे से तीन अवैध नल कनेक्शनो को कटवाया है तब आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन अवैध नलकनेक्शनो के राशि की पूर्ति वैध नलकनेक्शन धारियों पर बोझ डालकर की जा रही है तथा इन अवैध नलकनेक्शन धारियों की राशि किसकी जेबें गर्म कर रही हैं किसी को नहीं पता जो जांच का विषय बना हुआ है ।ऐसे अनेक मामले संदेहास्पद बने हुए हैं ।जो नगर भर मे चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके साथ ही जैसे तैसे आपूर्ति चालू होती हैं तो नलो से गंदगी भरा मटमैला पानी आना शुरू हो जाता है जिससे नगर भर मे इस जल से विभिन्न बीमारियों के फैलने का खतरा भी मंडराता दिखाई देने लगा है।
अधिकारियों की निष्क्रियता बनी मुसीबत
स्थानीय प्रशासन में वर्षों से जमे अधिकारी व कर्मचारी अपने स्वार्थ साधने में जुटे हैं। आमजन की समस्याएं इनकी प्राथमिकता में कहीं नहीं हैं। दफ्तरों में बैठकर राजनीति का लाभ उठाया जा रहा है, और क्षेत्रीय नेताओं के संरक्षण में यह लापरवाही फल-फूल रही है। शिकायतों के बावजूद न तो कोई कार्रवाई होती है, न ही कोई सुधार।
पर्यटकों की नज़रों में बिगड़ रही सांची की छवि
सांची जैसे ऐतिहासिक स्थल पर सुविधाओं की कमी से न केवल स्थानीय नागरिक परेशान हैं, बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटक भी असुविधा झेलने को मजबूर हैं। इससे सांची की अंतरराष्ट्रीय छवि पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
प्रशासनिक आदेशों की उड़ रही धज्जियां
जिला कलेक्टर द्वारा समय-समय पर मूलभूत सेवाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन ज़मीनी अमले की उदासीनता के चलते ये आदेश कागज़ों तक सीमित रह गए हैं। इससे न केवल जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं, बल्कि शासन की साख भी प्रभावित हो रही है।
आवश्यक है ठोस कार्रवाई
ऐसे हालात में शासन व प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप कर सांची नगर की उपेक्षित सुविधाओं की ओर ध्यान देना चाहिए। वर्षों से जमे अधिकारियों और लापरवाह कर्मचारियों पर सख्ती से कार्रवाई कर, जवाबदेही तय करना जरूरी है ताकि आमजन को राहत मिल सके और सांची की गरिमा बनी रह सके।






