नसीमखान
सांची।
भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बावजूद अन्नदाता किसान अपने खेतों में जुटे हुए हैं। एक ओर जहां आमजन विशेषकर संपन्न वर्ग बढ़ते तापमान में एयर कंडीशनर कमरों से बाहर निकलने से कतराते हैं, वहीं किसान तपती दोपहरी में भी खेतों की जुताई कर अगली फसल की तैयारी में लगे हैं।
हालांकि अधिकांश किसानों को अपनी उपज के वाजिब दाम नहीं मिल पाते, फिर भी देश के अन्नदाता न केवल अपने परिवार की चिंता करते हैं, बल्कि समूचे देशवासियों की भूख मिटाने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। अभी वे अपनी पिछली फसलें बेचकर निपटे भी नहीं थे कि अगली फसलों की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं।
खेतों में ट्रैक्टर से हकाई करते इन किसानों की मेहनत उस वर्ग के लिए एक सीख है जो गर्मी, सर्दी या बरसात में आराम की तलाश में रहते हैं। इन कठिन हालातों में भी किसानों को न तो भूख की परवाह होती है, न थकान की और न ही मौसम की मार की चिंता। उनका एक ही उद्देश्य होता है—खेत हरे रहें और अन्न का उत्पादन होता रहे।
दुर्भाग्यवश, इतनी मेहनत और समर्पण के बावजूद किसानों को न तो उनकी फसलों का उचित मूल्य मिल पाता है, न ही वह सामाजिक सम्मान, जिसके वे वास्तव में अधिकारी हैं। हर मौसम में खेतों में पसीना बहाने वाले ये किसान ही देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं, जिनके योगदान को उचित सम्मान और समर्थन मिलना आवश्यक है।






