नसीमखान रायसेन
रायसेन— राष्ट्रीय बौद्ध महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने आज रायसेन कलेक्टर को महामहिम राष्ट्रपति महोदया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में महाबोधि महाविहार, बोधगया को गैर-बौद्धों के नियंत्रण से मुक्त कर बौद्धों को सौंपने की माँग की गई।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि महाबोधि महाविहार बौद्ध धर्मावलंबियों का प्रमुख आस्था केंद्र है, जहाँ हर वर्ष देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं। यह स्थल यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित है। महासभा का कहना है कि बीटीएमसी एक्ट 1949 के अंतर्गत गैर-बौद्धों को महाविहार की प्रबंधन समिति में शामिल करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। महासभा ने इस कानून को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की माँग की है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि जैसे अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों का प्रबंधन उनके अनुयायियों द्वारा किया जाता है, वैसे ही महाबोधि महाविहार का सम्पूर्ण नियंत्रण भी बौद्धों को दिया जाए।
बौद्ध जिला अध्यक्ष रतन सिंह चौधरी ने कहा, “महाबोधि महाविहार हमारा सबसे पवित्र स्थल है, लेकिन आज भी बौद्धों को वहाँ निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। यह हमारे धर्मिक अधिकारों का हनन है। हम चाहते हैं कि भारत सरकार इस ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त करे और बौद्धों को उनका हक लौटाए।”
वहीं, आईटी सेल प्रभारी मुकेश बौद्ध ने कहा, “हमारा आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने धार्मिक अधिकारों के लिए है। बौद्ध समुदाय लंबे समय से उपेक्षित महसूस कर रहा है। यह ज्ञापन हमारी शांति और संवैधानिक तरीके से अधिकार प्राप्त करने की पहल है।”
इस अवसर पर सूरजपाल सर (पूर्व बसपा प्रत्याशी), घनश्याम अहिरवार, कालूराम चौधरी, भारत सिंह भारती, शुभम भारती सहित अनेक बौद्ध अनुयायी, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुयायी एवं भीम आर्मी के कार्यकर्ता उपस्थित थे।






