नसीमखान
सांची,,
विश्व धरोहर सांची, जहां देश-विदेश से हजारों पर्यटक प्रतिदिन पहुंचते हैं, वहां खाद्य सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर जिम्मेदार विभागों की घोर उदासीनता देखने को मिल रही है। नगर में बिक रही खाद्य सामग्री और पेय पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करने खाद्य विभाग को न तो फुर्सत है और न ही जिम्मेदारी का अहसास।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर में दर्जनों छोटे-बड़े होटल, ढाबे और खाद्य संस्थान संचालित हैं, जहां सादा भोजन से लेकर जूस, कोल्ड ड्रिंक्स और अन्य खाद्य उत्पाद पर्यटकों व स्थानीय नागरिकों को परोसे जा रहे हैं। लेकिन इन उत्पादों की गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों की जांच महीनों से नहीं हो सकी है। विभागीय टीम का यहां आना भी महज औपचारिकता बन कर रह गया है।
सूत्रों की मानें तो खाद्य विभाग की टीम महीने में कभी-कभार सांची का दौरा जरूर करती है, परंतु वह निरीक्षण करने की बजाय स्थानीय प्रतिष्ठानों से “लेन-देन” कर लौट जाती है। नतीजतन, उपभोक्ताओं को गुणवत्ताहीन, प्रदूषित एवं खुले में रखे खाद्य पदार्थों के सेवन को मजबूर होना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब खुले में रखे खाद्य पदार्थों के दूषित होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
यहां तक कि कई बार कलेक्टर द्वारा खाद्य निरीक्षण के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं, फिर भी विभाग द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। न तो सैंपलिंग की प्रक्रिया अपनाई गई, न ही किसी खाद्य विक्रेता के विरुद्ध कोई कार्रवाई सामने आई। इससे सांची जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के स्थल की छवि पर भी दाग लग रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और खाद्य विभाग की निष्क्रियता के चलते आमजन की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। अब यह आवश्यक हो गया है कि उच्च स्तर से इस मुद्दे को संज्ञान में लिया जाए और नियमित निरीक्षण की ठोस व्यवस्था की जाए, ताकि पर्यटकों और नागरिकों को सुरक्षित व स्वच्छ खाद्य सामग्री मिल सके।






