नसीमखान
सांची,,विश्वविख्यात ऐतिहासिक नगरी सांची की पहचान उसके बौद्ध स्मारकों और स्तूपों से है, लेकिन इस नगरी से होकर गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे तो बहुत होते हैं, मगर हकीकत यह है कि इस मार्ग पर दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के बाद से छोटे-बड़े वाहनों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। तेज रफ्तार वाहनों के चलते आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। न तो इस मार्ग पर गतिअवरोधक बनाए गए, न ही रेडियम चिन्ह, न ही धीमी गति के संकेतक बोर्ड और न ही सुरक्षात्मक संदेशवाहक बोर्ड लगाए गए। विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि दुर्घटनाओं में असंख्य लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और कई परिवार आर्थिक व मानसिक आघात झेलने को मजबूर हैं।
लोगों का आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग पूरी तरह मूकदर्शक बना हुआ है। तेज रफ्तार वाहन दुर्घटना के बाद फरार हो जाते हैं और घायल मौके पर तड़पते रहते हैं। सांची पुलिस हर बार घायलों को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश करती है, लेकिन कई गंभीर घायल पुलिस या एंबुलेंस पहुंचने के पहले ही दम तोड़ देते हैं।
जिला कलेक्टर द्वारा बार-बार निर्देश जारी करने के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग सुरक्षा उपायों की अनदेखी कर रहा है। जिला परिवहन विभाग पर भी लापरवाही के गंभीर आरोप हैं। लोगों का कहना है कि परिवहन विभाग तभी सक्रिय होता है जब उसकी जेबें भरनी हों, सड़क सुरक्षा से उसे कोई सरोकार नहीं।
ताजा हादसा : दो गंभीर घायल। भेजा अस्पताल।
सोमवार को सांची से करीब दो किमी दूर विदिशा मार्ग पर कमापार मंदिर के पास एक अज्ञात वाहन ने मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में बाइक सवार बासौदा निवासी दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंची सांची पुलिस ने 112 वाहन की मदद से घायलों को विदिशा मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। पुलिस के अनुसार गंभीर चोटों के कारण घायल अपना बयान दर्ज नहीं करा सके। फिलहाल पुलिस अज्ञात वाहन की तलाश में जुटी है।
हादसे के समय सक्रिय भूमिका निभाने वालों में प्रधान आरक्षक सुनील लोधी, आरक्षक शैलेन्द्र सिंह और वाहन पायलट नीलेश रजक शामिल थे।






