नसीमखान
सांची,,
जनपद पंचायत सांची अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने के लिए करोड़ों की योजनाएँ चल रही हैं, लेकिन लाखों रुपये की लागत से बनी सड़कें भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही हैं। न सरकार और न ही प्रशासन इस ओर ध्यान दे रहा है, नतीजा यह कि ग्रामीण और किसान जर्जर सड़कों पर चलने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की अधिकांश सड़कों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि बरसात में उन पर चलना तक मुश्किल हो गया। कई जगह सड़कें बारिश से ध्वस्त हो गईं, तो कहीं लापरवाही और भ्रष्टाचार ने उन्हें अधूरा छोड़ दिया। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर इन दिनों सड़कों की दुर्दशा खूब वायरल हो रही है।
सबसे ताजा मामला दीवानगंज क्षेत्र के ग्राम बरजोरपुर से जमनिया तक बनने वाली 3 किमी लंबी ग्रेवल सड़क का है। 23 लाख रुपये की लागत से आरईएस विभाग द्वारा निर्माण की जिम्मेदारी ली गई थी। परंतु निर्माण एजेंसी ने छह माह पहले केवल गिट्टी डालकर काम अधूरा छोड़ दिया। जल निकासी के लिए डाली गई पाइपलाइन भी अधूरी छोड़ दी गई। नतीजा यह है कि पूरे बरसात भर ग्रामीण, किसान, गर्भवती महिलाएं और बीमार मरीज इस जर्जर मार्ग पर भारी परेशानी झेलते रहे।
ग्रामवासियों ने नाराजगी जताते हुए कहा— “छह महीने से अधिक समय गुजर गया, लेकिन सड़क अधूरी पड़ी है। मरीजों को अस्पताल तक ले जाना मुश्किल हो गया है। किसान भी अपनी उपज मंडी तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। हमारी समस्याओं की ओर न सरकार का ध्यान है और न ही विभाग का।”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार और जनप्रतिनिधि जहां विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविकता बिल्कुल उलट है। अधूरी पड़ी सड़कें सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं।






