नसीमखान सांची
सांची,,,
कभी नगर के विकास की पहचान बताकर करोड़ों रुपये की लागत से शुरू की गई सौर पैनल एवं जलमल योजना आज ठंडे बस्ते में पड़ी नजर आ रही है। नगरवासियों को चौबीसों घंटे जलापूर्ति और सौर ऊर्जा के सहारे रोशन गलियों का सपना दिखाया गया था, पर अब न सौर ऊर्जा का असर बचा है, न जलमल योजना का अता-पता।
जानकारी के अनुसार, नगर की प्रसिद्धि को देखते हुए शासन ने यहां बड़े स्तर पर विकास योजनाएं शुरू की थीं। नागरिकों को घर-घर जलापूर्ति, सीवरलाइन कनेक्शन और सौर ऊर्जा से स्वच्छ नगर का वादा किया गया। इसके लिए करोड़ों रुपये की राशि मध्यप्रदेश नगरीय सेवाओं के उन्नयन कार्यक्रम के तहत एशियन डेवलपमेंट बैंक की सहायता से स्वीकृत की गई थी। योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी एमपी अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड को सौंपी गई थी।
शुरुआत में तो काम जोरशोर से चला, जगह-जगह पाइपलाइन और पोल लगाए गए, और नागरिकों को भरोसा हुआ कि अब 24 घंटे पानी मिलेगा। परंतु धीरे-धीरे सब ठप हो गया। न सीवरलाइन पूरी हुई, न जलापूर्ति चौबीस घंटे तक पहुंच सकी। आज भी नगरवासी नगर परिषद प्रशासन की सीमित आपूर्ति — दिनभर में मात्र 45 मिनट पानी — पर ही निर्भर हैं।
इसी तरह सौर ऊर्जा परियोजना, जिसके नाम पर नगर को “देश की पहली सोलर सिटी” का खिताब तक मिला, अब पूरी तरह दम तोड़ चुकी है। जिन पोलों पर सौर प्लेटें लगाई गई थीं, वे अब गायब या क्षतिग्रस्त हैं। जिन नागरिकों ने सौर कनेक्शन के लिए हजारों-लाखों रुपये खर्च किए, वे अब पछता रहे हैं। नगर में सौर ऊर्जा का नाम तक नहीं बचा है — केवल ठंडी पड़ी उम्मीदें और अधूरी योजनाएं बाकी हैं।
नागरिकों में चर्चा है कि विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च जरूर हुए, पर नतीजा अंधियारा और प्यास ही निकली। अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब योजनाएं धरातल पर आई ही नहीं, तो करोड़ों की यह राशि आखिर गई कहांगई ।कुछ कहा नहीं जा सकता है।






