संस्कृति मंत्री श्री धर्मेंद्र लोधी ने ली साँची विवि में समीक्षा बैठकबोधि वृक्ष के दर्शन, नवीन निर्माण कार्यों का निरीक्षण

नसीमखान सांची, रायसेन


साँची विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों में दिखाई रुचि
विश्वविद्यालय को अन्तरराष्ट्रीय बनाने का संकल्प- संस्कृति मंत्री

रायसेन,
साँची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मस्व विभाग के मंत्री श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने दौरा कर निर्माण कार्यों को देखा और समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। साँची विश्वविद्यालय परिसर में उन्होंने सर्वप्रथम बोधि वृक्ष के दर्शन किए और पौधारोपण किया। बोधि वृक्ष पर मंत्री जी का स्वागत कुलगुरू प्रो. वैद्यनाथ लाभ, कुलसचिव श्री विवेक पाण्डेय ने किया। बोधि वृक्ष दर्शन उपरांत मंत्री श्री लोधी ने समस्त शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कर्मचारियों से औपचारिक भेंट की और साँची विश्वविद्यालय के नए परिसर का निरीक्षण भी किया।
संस्कृति मंत्री ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में समस्त शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के एक साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की जिसमें नवीन परिसर निर्माण, पाठ्यक्रमों एवं छात्रों की संख्या के अलावा विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने निर्माण संबंधी कार्य समय पर पूरा करने एवं रास्तों के साथ फुटपाथ बनाने का भी सुझाव निर्माण एजेंसी को दिया।
कुलगुरू प्रो. लाभ और कुलसचिव श्री विवेक पाण्डेय की मौजूदगी में संस्कृति मंत्री द्वारा साँची विश्वविद्यालय को यथायोग्य सहायता एवं सुविधाएं देने का आश्वासन दिया गया। मंत्री श्री धर्मेंद्र लोधी ने कहा कि स्थापना के अनुरूप साँची विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने का उनका संकल्प है एवं विश्वविद्यालय के सभी अधिकारियों कर्मचारियों को इस संबंध में मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बौद्ध अध्ययन और भारतीय दर्शन तथा भारतीय धर्म और संस्कृति से जुड़े विषयों पर सांची विश्वविद्यालय को अन्य नए-नए पाठ्यक्रम भी लाने चाहिए। संस्कृति मंत्री ने दो पुस्तकों का विमोचन भी किया। समीक्षा बैठक में कुलुगुरु प्रो वैद्यनाथ लाभ ने विश्वविद्यालय की प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने संस्कृति मंत्री को इंडियन सोसायटी फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज (आईएसबीएस) के रजत जयंती सम्मेलन में भी आमंत्रित किया। कुलसचिव श्री विवेक पाण्डेय ने आभार प्रकट किया।

  • editornaseem

    Related Posts

    सिद्धेश्वरी माता मंदिर में धूमधाम से मनाया गया राम जन्मोत्सव।

    नसीमखान सांची राम जीवन से समरसता और संगठन निर्माण का संदेश, आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसमूह।सांची,,, नगर के सिद्धेश्वरी माता मंदिर में आज राम जन्मोत्सव का पर्व श्रद्धा और…

    धर्ममय हुई सांची नगरी, नवरात्रि में मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड।सुबह से जलाभिषेक व पूजा-अर्चना का सिलसिला, प्रमुख मंदिरों में दिखा आस्था का उत्साह।

    नसीमखान सांचीसांची,,,चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही ऐतिहासिक नगरी सांची पूरी तरह धर्ममय हो गई है। नगर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    सिद्धेश्वरी माता मंदिर में धूमधाम से मनाया गया राम जन्मोत्सव।

    सिद्धेश्वरी माता मंदिर में धूमधाम से मनाया गया राम जन्मोत्सव।

    धर्ममय हुई सांची नगरी, नवरात्रि में मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड।सुबह से जलाभिषेक व पूजा-अर्चना का सिलसिला, प्रमुख मंदिरों में दिखा आस्था का उत्साह।

    धर्ममय हुई सांची नगरी, नवरात्रि में मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड।सुबह से जलाभिषेक व पूजा-अर्चना का सिलसिला, प्रमुख मंदिरों में दिखा आस्था का उत्साह।

    विशाल चुनरी यात्रा ग्राम बेल्दी में निकाली गई।

    विशाल चुनरी यात्रा ग्राम बेल्दी में निकाली गई।

    हर्षोल्लास और सौहार्द के साथ मना ईद-उल-फितर का पर्व।नमाज के बाद देश में अमन-चैन और खुशहाली की मांगी दुआ, लोगों ने गले मिलकर दी मुबारकबादसांची,

    हर्षोल्लास और सौहार्द के साथ मना ईद-उल-फितर का पर्व।नमाज के बाद देश में अमन-चैन और खुशहाली की मांगी दुआ, लोगों ने गले मिलकर दी मुबारकबादसांची,

    धर्ममय हुई ऐतिहासिक नगरी सांची, मंदिरों में गूंजे भजन तो मस्जिद में अदा हुई अलविदा जुमे की नमाज।नौदुर्गा की शुरुआत से बढ़ी धार्मिक गतिविधियां, ईद की तैयारियों में भी दिखा उत्साह।

    धर्ममय हुई ऐतिहासिक नगरी सांची, मंदिरों में गूंजे भजन तो मस्जिद में अदा हुई अलविदा जुमे की नमाज।नौदुर्गा की शुरुआत से बढ़ी धार्मिक गतिविधियां, ईद की तैयारियों में भी दिखा उत्साह।

    सांची में हरित अभियान को रफ्तार, अगले वर्ष 6000 पौधों के रोपण का लक्ष्य।

    सांची में हरित अभियान को रफ्तार, अगले वर्ष 6000 पौधों के रोपण का लक्ष्य।