नसीमखान सांची
सांची,,,
ऐतिहासिक नगरी सांची में स्थित लगभग छह एकड़ क्षेत्रफल वाला शासकीय उद्यान इन दिनों विभागीय लापरवाही का शिकार बना हुआ है। वर्षों पहले 12 एकड़ में विकसित इस उद्यान का बड़ा हिस्सा पर्यटन विभाग को सौंपे जाने के बाद अब शेष भूमि पर फलदार वृक्ष एवं विभिन्न प्रजातियों के पौधों का उत्पादन किया जाता है। आम, अमरूद, आंवला सहित इन फलदार वृक्षों से हर वर्ष अच्छी-खासी आय होती है, साथ ही किसानों को पौधों का विक्रय तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी इसी उद्यान के माध्यम से दिया जाता है।
परंतु उद्यान की वर्तमान स्थिति इस आय को भी पलीता लगाने लगी है। इन दिनों अमरूद की तैयार खड़ी फसल नीलामी न होने के कारण तेजी से बर्बादी की ओर बढ़ रही है। उद्यान परिसर में बंदरों की बढ़ी हुई संख्या के चलते अमरूद बड़ी मात्रा में झड़ने लगे हैं, जबकि नीलामी में भाग लेने वाले लोग लंबे समय से प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
जब इस मामले में उद्यान अधीक्षक से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो पता चला कि वे अवकाश पर हैं। उनका प्रभार फिल्ड अधिकारी वर्षा निगम को सौंपा गया है, पर उनके भोपाल में ही अधिकतर निवासरत रहने से उद्यान की देखरेख कर्मचारियों के भरोसे ही चल रही है। इससे स्पष्ट है कि उद्यान की व्यवस्था ‘भगवान भरोसे’ संचालित हो रही है।
नीलामी में भाग लेने वाले व्यापारियों के अनुसार नीलामी समय पर न होने के कारण हर वर्ष फल की क्षति होती है और विभाग की आय में कमी आती है, साथ ही नीलामी में भाग लेने वालों को भी पूरा लाभ नहीं मिल पाता। नीलामी देर से होने पर फसल की गुणवत्ता गिर जाने से सरकारी राजस्व को भी नुकसान उठाना पड़ता है।
इस संबंध में उप संचालक उद्यान आर.एस. शर्मा ने बताया कि उद्यान से मिली जानकारी के आधार पर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और शीघ्र ही अमरूद की नीलामी करवाई जाएगी। उनका कहना है कि विभाग नीलामी तभी शुरू करता है, जब उद्यान से औपचारिक सूचना प्राप्त होती है।
स्थिति यह स्पष्ट करती है कि जिम्मेदार अधिकारियों की ढिलाई न केवल फसल को उजड़ने की कगार पर ले आई है, बल्कि विभागीय आय पर भी बड़ा प्रहार कर रही है। समय पर नीलामी न होना कहीं न कहीं विभागीय अनियमितताओं और शासकीय उद्यान में बढ़ती अव्यवस्था को उजागर करता है ।






