नसीमखान सांची
सांची,, आसमान छूती महंगाई के चलते मध्यम वर्गीय परिवारों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। सरकारें गरीबों के लिए योजनाएँ चला रही हैं और विकास के बड़े दावे कर रही हैं, लेकिन मध्यम वर्ग की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आटा, दाल, तेल, सब्जी से लेकर गैस सिलेंडर तक, हर वस्तु की कीमतें रोज नए रिकॉर्ड बना रही हैं। सीमित आय में घर का बजट संभालना कठिन हो चुका है। बच्चों की शिक्षा और विवाह जैसे आवश्यक खर्च भी कर्ज लेकर पूरे करने पड़ रहे हैं।
राशन दुकानदार का कहना है कि “सप्लायर कंपनियाँ खुद ऊँचे दाम पर माल दे रही हैं। ऐसे में हमारा भी खर्च बढ़ रहा है और मजबूरी में ग्राहकों को महंगा सामान देना पड़ता है।”
ग्राहक बताते हैं कि “महीने का बजट अब 10-15 दिन में ही खत्म हो जाता है। सरकार को सिर्फ घोषणाओं से नहीं, जमीनी स्तर पर भी महंगाई रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।”
जनता का आरोप है कि मूल्य नियंत्रण के नाम पर सरकारी विभागों की सक्रियता केवल कागजों तक सीमित है, जबकि बाजार में लगातार महंगाई का दबदबा बना हुआ है।
महंगाई की इस मार से कब मिलेगी राहत — यही सवाल अब हर घर में गूंज रहा है।






