इन दिनों पत्रकार और पत्रकारिता बड़े संकट के दौर से गुजर रही है इसी कड़ी में विदिशा में भी पत्रकार पर हथकड़ियों से जकड़ा जा रहा है पत्रकारों ने एक निजी ग्रुप पर आपसी चर्चा किया कि विदिशा तहसीलदार ने उन्हें नोटिस थमा दिया इस बात को लेकर आप प्रकाशन पर सवाल खड़े कर रहे हैं ।
लोकेशन: विदिशा
जहाँ लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आज खुद सवालों के घेरे में है…
कलम पर पहरा…
सच पर सजा…
और सोशल मीडिया पर लिखने की कीमत… नोटिस!
जहाँ लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आज खुद सवालों के घेरे में है…
कलम पर पहरा…
सच पर सजा…
और सोशल मीडिया पर लिखने की कीमत… नोटिस!
विदिशा में तहसीलदार द्वारा पत्रकारों को नोटिस जारी करने के बाद
मीडिया जगत में हड़कंप मच गया है…
विदिशा जिले में पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं…
तहसीलदार द्वारा जारी किए गए नोटिस ने पूरे मीडिया जगत को हिला दिया है…
आरोप है कि कुछ पत्रकारों को सोशल मीडिया पर लिखे गए पोस्ट के बाद नोटिस भेजे गए…
जिसे पत्रकार संगठनों ने प्रेस की आज़ादी पर सीधा हमला बताया है…
इसी के विरोध में जिले के सभी प्रमुख पत्रकार एकजुट हुए…
और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद की…
कलेक्ट्रेट के बाहर खड़े पत्रकार
ज्ञापन सौंपते हुए दृश्य
प्रेस क्लब की बैठक के शॉट
विरोध करते हुए पत्रकार
बाइट सचिन तिवारी प्रेस क्लब अध्यक्ष ग्रे जैकेट
“हम किसी दबाव में नहीं आएंगे…
प्रेस की आजादी से कोई समझौता नहीं होगा…”
मामला यहीं नहीं रुका…
तहसीलदार के इस कदम के खिलाफ
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी विरोध जताया…
प्रेस क्लब ने आरोप लगाया कि
प्रेस की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है…
बाइट प्रियंका किरार कांग्रेस महिला प्रवक्ता
बाइट मोहित रघुवंशी जिला कांग्रेस अध्यक्ष
“यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है…”
अब सवाल बड़ा है…
क्या सच लिखना अब अपराध बनता जा रहा है?






