राजर्षि मिश्रा
पड़वार निवासी भाईयादयाल तिवारी के सुपुत्र तिलकोत्सव कार्यक्रम में सराहनीय कदम
उमरिया/मानपुर चिल्हारी
बफर सिस्टम की जगह शादियों और अन्य आयोजनों में बैठकर पारंपरिक तरीके से भोजन (पंक्तिबद्ध या स्टील थाली ) कराने की पहल निश्चित रूप से एक बहुत ही सराहनीय और स्वागतयोग्य कदम है। यह न केवल हमारी संस्कृति को जीवंत करता है, बल्कि आधुनिक समय में कई समस्याओं का समाधान भी है।इस नई (या पुनर्जीवित) प्रथा के मुख्य लाभ और सराहनीय पहल है भोजन की बर्बादी में कमी बफर में लोग अक्सर जरूरत से ज्यादा प्लेट में ले लेते हैं और खाना बर्बाद होता है। बैठकर परोसने वाली व्यवस्था में भोजन व्यर्थ नहीं होता।अनुशासन और सम्मान खड़े होकर या भागदौड़ करके खाना खाने की तुलना में बैठकर आराम से भोजन करना अधिक सम्मानजनक है। यह विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों के लिए आरामदायक होता है।
ऐसा ही एक मिशाल पेश की है उमरिया जिले मानपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पड़वार निवासी भाईयादयाल तिवारी के भाई शिवमंगल तिवारी एवं सरपंच रूपा रामायण तिवारी के छोटे भाई मनीष तिवारी तिलकोत्सव कार्यक्रम में बफर की जगह बैठकर सम्मान जनक आसन लगाकर चौकी पटा थाली व्यवस्थित आसन लगाकर भोजन कराया गया है। जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है इस भाग दौड़ व्यस्ततम समय में इस तरह का आयोजन करना तारीफ है काबिल है जो समाज में एक चर्चा का विषय बन गया लगभग 500 से ज्यादा आगंतुकों को भोजन बैठकर करवाया गया।
बैठाकर भोजन कराने से बेहतर लाभ
बेहतर पाचन (स्वास्थ्य लाभ) जमीन पर या कुर्सी पर बैठकर खाना खाने से पाचन क्रिया बेहतर होती है। आयुर्वेद के अनुसार, इस तरह बैठकर खाने से शरीर को भोजन का पूरा पोषण मिलता है और मोटापा या गैस जैसी समस्याएं नहीं होतीं।अपनापन और संवाद: जब लोग एक साथ बैठकर खाते हैं, तो बातचीत बढ़ती है और आपसी भाईचारा व अपनापन मजबूत होता है।स्वच्छता और व्यवस्था: इस व्यवस्था में परोसने वाले लोग (सर्वर्स) होते हैं, जिससे खाना गंदा नहीं होता और पूरी व्यवस्था व्यवस्थित रहती है।





