नसीमखान सांची
माध्यमिक स्तर तक शिक्षा निःशुल्क, उच्च कक्षाओं में विभिन्न मदों के शुल्क से बढ़ी चर्चा; विद्यालय प्रबंधन ने दी सफाई
सांची,,,
नगर के सांदीपनि शासकीय विद्यालय में कक्षा 9 से 12 तक लागू की गई शुल्क व्यवस्था को लेकर अभिभावकों के बीच चर्चा और चिंता का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। उत्कृष्ट एवं सुलभ शिक्षा की अवधारणा के साथ विकसित किए गए इस विद्यालय में अब उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों से विभिन्न मदों में शुल्क लिए जाने पर कई परिवारों ने आर्थिक बोझ बढ़ने की बात कही है।
जानकारी के अनुसार पूर्व में संचालित शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय का उन्नयन कर इसे सीएम राइज स्कूल के रूप में विकसित किया गया था, जिसके लिए करोड़ों रुपए की लागत से आधुनिक भवन और सुविधाएं तैयार की गईं। साथ ही आसपास के ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों के विद्यार्थियों को विद्यालय तक लाने-ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था भी की गई, ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंच सके। बाद में इस विद्यालय का नाम सांदीपनि शासकीय विद्यालय किया गया।
बताया जाता है कि विद्यालय में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ी और वर्तमान में यह संख्या लगभग डेढ़ हजार तक पहुंच चुकी है। छात्रों की बढ़ती संख्या के साथ प्रवेश प्रक्रिया भी सीट आधारित होने लगी। इसी बीच कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं के नाम पर शुल्क लिए जाने की व्यवस्था लागू होने से अभिभावकों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
कुछ अभिभावकों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों की ओर रुख करने का प्रमुख कारण गुणवत्तापूर्ण और कम खर्च वाली शिक्षा था, लेकिन अब अतिरिक्त शुल्क की व्यवस्था आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए चुनौती बन सकती है। उनका मानना है कि यदि विद्यालय संचालन, सफाई, खेल गतिविधियों तथा अतिरिक्त शिक्षकों की व्यवस्था के लिए संसाधनों की आवश्यकता है तो शासन स्तर पर अतिरिक्त वित्तीय सहायता पर विचार किया जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों पर आर्थिक दबाव कम हो। इस शुल्क के फैसले से पालकों मे भी चिंता दिखाई देने लगी है ।
इस मामले में विद्यालय प्रबंधन का कहना है।।
सांदीपनि शासकीय विद्यालय के प्राचार्य अनिल दीक्षित ने बताया कि माध्यमिक स्तर तक विद्यार्थियों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। कक्षा 9 से 12 तक शासन के निर्देशों के अनुरूप सीमित शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसका उपयोग विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं, सफाई व्यवस्था, खेल गतिविधियों, अतिरिक्त शैक्षणिक आवश्यकताओं तथा व्यवस्थागत संचालन में किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह शुल्क निजी विद्यालयों की तुलना में काफी कम है तथा विद्यालय संचालन के लिए अतिरिक्त फंड उपलब्ध नहीं कराया गया है। बस व्यवस्था शासन स्तर से संचालित की जा रही है।
उत्कृष्ट शिक्षा की दिशा में विकसित हो रहे संस्थानों में गुणवत्ता और आर्थिक पहुंच—दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना अब सबसे बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।





