नसीमखान सांची
सांची,,, मानसून की शुरुआती अच्छी बारिश से उत्साहित किसानों ने सोयाबीन की बुवाई और धान की रोपाई का कार्य तेज गति से शुरू कर दिया था। लेकिन बुवाई और रोपाई का कार्य पूरा होने से पहले ही बारिश थम गई और आसमान से बादल गायब हो गए। लगातार बढ़ती गर्मी और वर्षा के अभाव ने किसानों की चिंता फिर बढ़ा दी है।
क्षेत्र के किसानों के अनुसार प्रारंभिक बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी होने से सोयाबीन की बुवाई बड़े पैमाने पर की गई, वहीं धान की रोपाई के लिए खेत तैयार कर बाहरी मजदूरों की मदद ली गई। किसानों ने प्रतिदिन हजारों रुपये खर्च कर धान की रोपाई कराई, लेकिन अब वर्षा रुक जाने से रोपी गई धान और अंकुरित सोयाबीन दोनों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
जिन किसानों के पास ट्यूबवेल या सिंचाई के अन्य साधन उपलब्ध हैं, वे किसी तरह फसलों को पानी देने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि नदी-नालों का जलस्तर भी तेजी से घट रहा है और शुरुआती बारिश से भूजल स्तर में कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में सिंचाई के संसाधन भी सीमित होते जा रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सोयाबीन और धान दोनों ही फसलें प्रारंभिक अवस्था में पर्याप्त नमी और नियमित वर्षा पर निर्भर रहती हैं। यदि शीघ्र ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसलों की बढ़वार प्रभावित होने के साथ उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
क्षेत्र के किसान अब अच्छी वर्षा की उम्मीद में आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश नहीं हुई तो खरीफ की प्रमुख फसलें गंभीर संकट में आ सकती हैं और किसानों की मेहनत तथा लागत पर पानी फिरने की आशंका बढ़ जाएगी।
मानसून की अगली बारिश अब किसानों के लिए केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, उम्मीद और पूरी खरीफ फसल को बचाने का आधार बन गई है।





