नसीमखान सांची
₹125 लाख की जलसंवर्धन योजना समयसीमा के तीन वर्ष बाद भी अधूरी, बारिश के मौसम में भी नहीं बदली जलापूर्ति व्यवस्था
सांची,,, विश्व प्रसिद्ध पर्यटन एवं ऐतिहासिक नगरी सांची में नागरिकों को 24 घंटे पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई जलसंवर्धन योजना छह वर्ष बाद भी अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी है। योजना पर लगभग ₹125 करोड़ की लागत स्वीकृत होने के बावजूद नगरवासियों को आज भी दो दिन में केवल एक बार ही पानी मिल रहा है। ऐसे में बारिश के मौसम में भी जलापूर्ति की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
जानकारी के अनुसार, नगर की ऐतिहासिक एवं पर्यटन महत्व को देखते हुए नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जलसंवर्धन योजना लागू की गई थी। योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी को दी गई, जबकि संविदाकार के रूप में मेसर्स मल्टी अर्बन इंफ्रा सर्विसेस प्रा. लि., नागपुर को नियुक्त किया गया।
इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ 4 अगस्त 2020 को बड़े स्तर पर किया गया था। योजना का मुख्य उद्देश्य नगर के प्रत्येक घर तक चौबीसों घंटे पेयजल उपलब्ध कराना तथा जलसंकट की समस्या का स्थायी समाधान करना था। इसके लिए 23 सितंबर 2023 तक कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा निर्धारित की गई थी, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के लगभग तीन वर्ष बाद भी योजना अधूरी है।
योजना में लगातार हो रही देरी को लेकर नगर परिषद ने कई बार संबंधित कंपनी को पत्र लिखे, बैठकों में अधिकारियों को तलब कर चेतावनी भी दी। गंभीर जलसंकट के दौरान परिषद द्वारा कंपनी के कार्यालय पर तालाबंदी तक की गई, लेकिन इसके बावजूद केवल आश्वासन ही मिलते रहे और कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका।
गर्मी के मौसम में जलसंकट बढ़ने पर नगर परिषद को मजबूर होकर दो दिन में एक बार जलापूर्ति की व्यवस्था लागू करनी पड़ी थी, ताकि उपलब्ध संसाधनों से पूरे नगर में पानी पहुंचाया जा सके। बाद में कंपनी ने जलापूर्ति का संचालन अपने हाथ में लिया, लेकिन व्यवस्था में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ। वर्तमान में भी नगरवासियों को दो दिन में एक बार, वह भी सीमित समय के लिए ही पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
बारिश का मौसम शुरू होने के बावजूद जलापूर्ति का वही पुराना क्रम जारी है। नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी उन्हें प्रतिदिन पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में 24 घंटे जलापूर्ति का सपना अब भी अधूरा बना हुआ है।
नगरवासियों का कहना है कि शासन और प्रशासन को योजना की प्रगति की प्रभावी निगरानी कर शीघ्र कार्य पूर्ण कराना चाहिए, ताकि वर्षों से लंबित इस महत्वाकांक्षी योजना का वास्तविक लाभ आम जनता को मिल सके।





