सोशल मीडिया की ‘रील पॉलिटिक्स’ में क्यों घिरे नितिन गडकरी ? जानिए 11 करोड़ के मानहानि मुकदमे की पूरी कहानी

अंकित जोशी |Live khabar india

आज के दौर में सोशल मीडिया जहां किसी को रातों-रात लोकप्रिय बना सकता है, वहीं कुछ ही घंटों में किसी की छवि को नुकसान भी पहुंचा सकता है। पिछले कुछ समय से देश की राजनीति में सोशल मीडिया के जरिए नेताओं को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक अभियान देखने को मिला और अब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी इसी तरह के विवाद के केंद्र में आ गए हैं।

मामला इतना बढ़ गया कि नितिन गडकरी को अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित डीपफेक और मानहानिकारक सामग्री को लेकर 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

नितिन गडकरी की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि सोशल मीडिया पर कई ऐसे पोस्ट और वीडियो वायरल किए गए, जिनमें उन्हें केंद्र सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी से कथित आर्थिक लाभ लेने वाले व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। याचिका के अनुसार, इस सामग्री का उद्देश्य उनकी सार्वजनिक छवि को धूमिल करना था।
याचिका में सोशल मीडिया पर प्रसारित 24 पोस्टों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें केंद्रीय मंत्री ने मानहानिकारक और भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि इन पोस्टों के जरिए उन्हें ई-20 ईंधन नीति विवाद से गलत तरीके से जोड़कर जनता के बीच भ्रम पैदा किया गया।

क्या है E-20 और क्यों बना विवाद का विषय?

E-20 एक ऐसा ईंधन मिश्रण है जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का उपयोग किया जाता है। केंद्र सरकार लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है। सरकार का दावा है कि इससे पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी और किसानों को भी लाभ मिलेगा।
हालांकि, विपक्षी दलों और कुछ विशेषज्ञों ने इस नीति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि देश के करोड़ों वाहनों पर इसके प्रभावों को लेकर व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन और पारदर्शी जानकारी सामने आनी चाहिए।

बॉम्बे हाई कोर्ट में क्या हुआ?

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की पीठ ने नितिन गडकरी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप एस. लड्डा को मुकदमे से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त तक के लिए निर्धारित की है।
गडकरी ने अदालत से मांग की है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद कथित मानहानिकारक सामग्री को तत्काल हटाने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही, उन्होंने 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग भी की है।

सोशल मीडिया और डीपफेक बना बड़ी चुनौती

बीते कुछ वर्षों में डीपफेक तकनीक तेजी से सामने आई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किसी भी व्यक्ति के चेहरे और आवाज का इस्तेमाल कर भ्रामक वीडियो तैयार किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी राजनीति और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
नितिन गडकरी का कहना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की सुनियोजित कोशिश की गई है। यही कारण है कि उन्होंने इस मामले को न्यायपालिका के समक्ष रखा है।

विपक्ष ने भी उठाए सवाल

इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। आम आदमी पार्टी ने E-20 नीति को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे पर जनसमर्थन जुटाने के लिए ‘नेशनल टाउन हॉल’ आयोजित करने की घोषणा की है।
वहीं कांग्रेस ने भी एथेनॉल नीति को वापस लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि करोड़ों वाहन मालिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस नीति की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए।

क्या सोशल मीडिया पर नियंत्रण की जरूरत है?

यह मामला केवल नितिन गडकरी की मानहानि तक सीमित नहीं है। इससे एक बड़ा सवाल भी खड़ा हुआ है कि क्या सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक और डीपफेक सामग्री को नियंत्रित करने के लिए और अधिक प्रभावी कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता है?
आज किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति को कुछ मिनटों में वायरल पोस्ट के जरिए निशाना बनाया जा सकता है। ऐसे में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनता जा रहा है।

निष्कर्ष

नितिन गडकरी का मामला इस बात का संकेत है कि डिजिटल युग में राजनीतिक लड़ाइयां केवल संसद या चुनावी मंचों तक सीमित नहीं रह गई हैं। सोशल मीडिया अब राजनीतिक विमर्श का सबसे बड़ा मंच बन चुका है, जहां एक वायरल वीडियो या पोस्ट किसी भी व्यक्ति की सार्वजनिक छवि को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में अदालत का फैसला न केवल इस मामले के लिए बल्कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सामग्री के खिलाफ भविष्य की कानूनी दिशा भी तय कर सकता है

सोशल मीडिया की ‘रील पॉलिटिक्स’ में क्यों घिरे नितिन गडकरी ? जानिए 11 करोड़ के मानहानि मुकदमे की पूरी कहानी

  • Live khabar india

    Live Khabar India हिंदी भाषा का एक डिजिटल समाचार पोर्टल है, जो मध्य प्रदेश सहित देशभर की ताजा और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुंचाता है। हम राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन, खेल और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक रिपोर्टिंग के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    Related Posts

    स्कूल के पास से सड़क निर्माण पर उचेर के ग्रामीणों ने जताई आपत्तिप्रधानमंत्री सड़क योजना के महाप्रबंधक को सौंपा आवेदन, वैकल्पिक नहर मार्ग से सड़क बनाने की मांग

    नसीम खानसांची,,,समीपस्थ ग्राम उचेर से सूखा करार तक स्वीकृत सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों और स्कूली छात्र-छात्राओं ने आपत्ति दर्ज कराई है। ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री सड़क योजना के महाप्रबंधक को…

    सांची में पर्यूषण महापर्व पर जैन मंदिर में हुई विशेष सजावट, भगवान महावीर की हुई महापूजा

    नसीम खानसांची, ,,रायसेन। जैन धर्म के पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व के अवसर पर सांची के श्री 1008 शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र में विशेष तैयारियां की गई हैं। मंदिर को…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    स्कूल के पास से सड़क निर्माण पर उचेर के ग्रामीणों ने जताई आपत्तिप्रधानमंत्री सड़क योजना के महाप्रबंधक को सौंपा आवेदन, वैकल्पिक नहर मार्ग से सड़क बनाने की मांग

    स्कूल के पास से सड़क निर्माण पर उचेर के ग्रामीणों ने जताई आपत्तिप्रधानमंत्री सड़क योजना के महाप्रबंधक को सौंपा आवेदन, वैकल्पिक नहर मार्ग से सड़क बनाने की मांग

    सांची में पर्यूषण महापर्व पर जैन मंदिर में हुई विशेष सजावट, भगवान महावीर की हुई महापूजा

    सांची में पर्यूषण महापर्व पर जैन मंदिर में हुई विशेष सजावट, भगवान महावीर की हुई महापूजा

    सांची में पर्यूषण महापर्व पर जैन मंदिर में हुई विशेष सजावट, भगवान महावीर की हुई महापूजा

    सांची में पर्यूषण महापर्व पर जैन मंदिर में हुई विशेष सजावट, भगवान महावीर की हुई महापूजा

    निर्माणाधीन शवगृह में बिना पलस्तर पुताई, गुणवत्ता पर उठे सवालघटिया ईंट और पुराने भवन की सामग्री के उपयोग की भी चर्चा, जिम्मेदार विभाग की निगरानी पर सवाल

    निर्माणाधीन शवगृह में बिना पलस्तर पुताई, गुणवत्ता पर उठे सवालघटिया ईंट और पुराने भवन की सामग्री के उपयोग की भी चर्चा, जिम्मेदार विभाग की निगरानी पर सवाल

    सांची में त्योहारों पर विशेष स्वच्छता अभियान, धार्मिक स्थलों के आसपास सफाई पर विशेष जोर

    सांची में त्योहारों पर विशेष स्वच्छता अभियान, धार्मिक स्थलों के आसपास सफाई पर विशेष जोर

    कलेक्टर श्री विश्वकर्मा की अध्यक्षता में प्रबंधन समिति की बैठक सम्पन्न

    कलेक्टर श्री विश्वकर्मा की अध्यक्षता में प्रबंधन समिति की बैठक सम्पन्न