नसीम खान
सांची,,,सिविल अस्पताल सांची में निर्माणाधीन मर्चुरी रूम (शवगृह) का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है, लेकिन निर्माण के दौरान सामने आ रही स्थितियों ने इसकी गुणवत्ता और जिम्मेदार विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माणाधीन भवन की कुछ दीवारों सहित छत के अंदरूनी हिस्से में बिना पलस्तर किए ही पुट्टी एवं पुताई किए जाने की बात सामने आई है।
जानकारी के अनुसार सांची सिविल अस्पताल में पूर्व से निर्मित मर्चुरी रूम छोटा होने के कारण अस्पताल की आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त नहीं था। इसके बाद शासन द्वारा अस्पताल की जरूरत को देखते हुए नए मर्चुरी रूम की स्वीकृति दी गई और लाखों रुपये की लागत से इसका निर्माण शुरू कराया गया।
निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से ही इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। निर्माण में घटिया ईंटों के उपयोग के साथ पुराने भवन को तोड़ने के बाद निकली निर्माण सामग्री के उपयोग की भी जानकारी सामने आ रही है। इन निर्माण संबंधी बिंदुओं की जांच होने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं अब निर्माण के अंतिम चरण में कुछ दीवारों और छत के अंदरूनी हिस्से में बिना पलस्तर किए पुट्टी एवं पुताई किए जाने से निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरा गए हैं।
आमतौर पर भवन की दीवारों और छत पर पलस्तर का कार्य पूरा होने के बाद ही पुट्टी एवं पुताई की जाती है। ऐसे में शवों को सुरक्षित रखने के लिए बनाए जा रहे महत्वपूर्ण भवन में निर्माण के निर्धारित मानकों का पालन हुआ है या नहीं, यह जांच का विषय बन गया है।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि लाखों रुपये की लागत से हो रहे इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता की नियमित निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी। यदि निर्माण के दौरान निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं हुआ है तो समय रहते संबंधित अधिकारियों द्वारा इसकी जांच क्यों नहीं की गई।
इस मामले में सीबीएमओ डॉ. लक्ष्मी कुमार ने कहा कि मामले को देखते हैं और संबंधित इंजीनियर से बात करते हैं। इसके बाद ही कोई कार्रवाई की जा सकती है।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग निर्माणाधीन शवगृह की गुणवत्ता की जांच कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करता है या फिर निर्माण पूरा होने के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलती है।





