नसीम खान संपादक
-आग बुझने के बाद रायसेन से आई फायर ब्रिगेड
-नुकसान का पंचनामा बनाने मोके पर नही पहुंचे पटवारी
सांची।
सलामतपुर के सरकारी अस्पताल के सामने रविवार दोपहर के समय किसान के खेत में आग लग गई। जिससे गेंहू की 5 एकड़ क्षेत्र की फसल जलकर बर्बाद होने से किसान का लगभग एक से डेढ़ लाख रुपए का नुकसान हो गया। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। सलामतपुर पुलिस व स्थानीय ग्रामीणों की सूझबूझ के चलते आग पर जल्दी ही काबू पा लिया गया। वरना तेज़ हवा चलने के कारण आग आगे के खेतों में पहुंच जाती। वहीं मोके पर रायसेन से फायर ब्रिगेड आग बुझने के बाद पहुंची। पुलिस से मिली जानकारी अनुसार सरकारी अस्पताल के सामने रायसेन निवासी महेश उपाध्याय का खेत है। जो उन्होंने कोल्ही से ढकना वाले किसान बद्री राजपूत व उनके अन्य साथियों को दे रखा है। रविवार दोपहर के समय खेत में अचानक गेंहूँ की खड़ी फसल में आग लग गई। और तेज़ी से फैलने लगी। पास में ही थाने होने के कारण पुलिस व स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। और पांच ट्रैक्टरों की मदद से आग को आगे बढ़ने से रोका लेकिन फिर भी किसान की पांच एकड़ गेंहू की फसल जलकर राख हो गई। जिससे किसान को एक से डेढ़ लाख रुपए का नुकसान हो गया। यहां पर गौर करने वाली बात यह है कि पुलिस ने फायर ब्रिगेड के लिए रायसेन फोन लगाया लेकिन फायर ब्रिगेड आग बुझने के बाद मौके पर पहुंचीं। वहीं हल्के के पटवारी नंदलाल पंवार भी मौके से नदारत रहे। बताया जा रहा है कि वह भोपाल से अपडाउन करके आते हैं। जिसकी वजह से किसान के नुकसान का पंचनामा नही बन पाया।
बढ़ रही हैं आगजनी की घटनाएं क्षेत्र में नही है फायर ब्रिगेड—-
सलामतपुर, बेरखेड़ी चौराहा और दीवानगंज क्षेत्र में काफी समय से फायर ब्रिगेड की मांग की जा रही है। लेकिन ज़िम्मेदार अधिकारी कोई भी सुनवाई नही कर रहे हैं। जिसकी वजह से किसान की खड़ी फसलें जलकर बर्बाद हो रही हैं। सलामतपुर, दीवानगंज, बेरखेड़ी चौराहा और ढकना चपना गांव में हमेशा ही फायर ब्रिगेड की कमी खलती है। यहां गर्मियों में मौसम में जब गेंहू की फसलें खड़ी रहती हैं। तो आगजनी की घटनाएं बड़ी संख्या में होती हैं। फायर ब्रिगेड के लिए सांची या रायसेन सूचना दी जाती है। लेकिन जब तक फायर ब्रिगेड मोके पर पहुंचती है। तब तक फसलें जलकर राख हो जाती हैं। हालांकि नगर परिषद सांची में फायर ब्रिगेड तो है परन्तु वह मात्र शोपीस बनकर रह जाती है जबकि इस फायर ब्रिगेड पर एक चालक एवं एक सहायक की ड्यूटी सालभर बनी रहती है परन्तु जब जब कहीं अग्निकांड की खबर आती है तब तब फायर ब्रिगेड बिगड़ जाती है ऐसा भी नहीं है कि इस फायर ब्रिगेड की मरम्मत पर लाखों रुपए खर्च न किये जाते हैं तथा इस पर खर्च होने वाली सरकारी राशि हमेशा चर्चित बनी रहती है तब इसका खामियाजा खेतों में लगने वाली आग का किसानों को भोगना पड़ता है । अब क्षेत्र के किसानों ने शासन प्रशासन में मांग की है कि दो फायर ब्रिगेड की व्यवस्था एक सलामतपुर और एक दीवानगंज क्षेत्र में भी होना चाहिए। जिससे कि आगजनी की घटनाओं में समय पर किसानों को सहायता मिल सके। तथा फसलों में लगने वाली आग पर काबू पाया जा सके ।






