यहां खतरे में बचपन ,मनरेगा में मासूम बच्चों से कराया जा रहा काम , आप ही बताओ सरकार अब कैसे पड़े और कैसे बड़े हम

शहडोल जयसिंगनगर
रिपोर्टर दीपक कुमार गर्ग

शहडोल जिले के जनपद पंचायत जयसिंहनगर के ग्राम पंचायत बिनैका से एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है जिस उम्र में इनके हाथों में किताबें और पेन होना चाहिए, उस उम्र में इन बच्चों के हाथों में फावड़ा, कुदाल और मिट्टी से भरे तसले देकर काम कराया जा रहा है. ऐसे में एक तरफ जहां देश के नौनिहालों को शिक्षित करने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ यहां काम कराने के लिए नौनिहालों के भविष्य से खुले आम खिलवाड़ हो रहा है. एमपी के शहडोल में सरकार द्वारा निर्धारित नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. यहां नाबालिग बच्चों से मनरेगा योजना के तहत होने वाले काम को कराया जा रहा है.


बाल मजदूरी हमारे समाज का वो कड़वा सच है, जिसे झुठलाया नहीं जा सकता। बचपन इंसान की जिदगी का सबसे हसीन पल होता है। बचपन में न किसी बात की चिता होती है और न किसी का कर डर, लेकिन हर इंसान को बचपन में यह पल नसीब हो, यह संभव नहीं है। कुछ लोगों का बचपन गरीबी में पेट भरने की जद्दोजहद में काम के बोझ तले दबकर रह जाता है। जनपद पंचायत जयसिंहनगर में स्थित ग्राम पंचायत बिनैका, में स्टाप डैम का निर्माण कार्य छोटे -छोटे बच्चों को बाल मजदूरी में पिसते हुए देखा जा सकता है। नाबालिग बच्चों से काम कराना अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन सबकुछ देखकर भी प्रशासन से लेकर अन्य संस्थाएं मौन बनी हैं।


जनपद जयसिंहनगर में चंद रुपये के लिए मासूम बच्चों से बालश्रम कराते हैं। कहीं मासूमों के अभिभावकों की मजबूरी के चलते वह बाल मजदूरी करते हैं। जनपद जयसिंहनगर के बिनैका में खेलने-कूदने व पढ़ने-लिखने की उम्र में बच्चों को बालश्रम में पिसते देखा जा सकता है। बावजूद इसके प्रशासन लापरवाही बरतते हुए इस अपराध को रोकने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं कर रहे हैं। सरकार द्वारा बाल मजदूरी पर अंकुश लगाने के लिए नई-नई योजनाएं बनाई जा रही हैं, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते योजनाएं धरातल पर दिखाई नहीं देती। सरकार के नियमों के अनुसार कोई भी 14 वर्ष से कम आयु का बच्चा, जो मजदूरी करता है, बाल श्रमिक की श्रेणी में आता है।


धरातल पर नहीं आती सरकार की योजनाएं
– ऐसा नहीं है कि बाल मजदूरी रोकने के लिए सरकार काम नहीं कर रही। सरकार की तरह-तरह की योजनाओं के द्वारा गरीब व असहाय बच्चों को सरकारी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा, मुफ्त किताबें, मुफ्त स्कूली ड्रेस यहां तक भी भोजन प्रदान किए जाने की व्यवस्था है, लेकिन महज दिखावे के लिए चंद बच्चों को इन योजनाओं का लाभ मिल पाता है, जबकि अधिकारियों की अनदेखी से हजारों की संख्या में बच्चे इन योजनाओं से वंचित रह जाते हैं।


वही इस विषय की जानकारी के लिए इंजीनियर आदित्य द्विवेदी को फोन किया गया तो साहब ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझे

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