फर्जी शादी घोटाला: पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के रिश्तेदार गिरफ्तार, 5,923 शादियों के नाम पर बांटे ₹30.18 करोड़

सिरोंज में फर्जी शादी घोटाले का बड़ा खुलासा, 5,923 संदिग्ध विवाह और ₹30.18 करोड़ की सहायता राशि का मामला

विदिशा के सिरोंज में फर्जी शादी घोटाले की जांच में 5,923 संदिग्ध विवाह और ₹30.18 करोड़ की सहायता राशि बांटने का मामला सामने आया है। ED ने पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के रिश्तेदार को गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट : नवेद खान


विदिशा/सिरोंज। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र में विवाह सहायता योजना से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच में बड़ा खुलासा सामने आया है। अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2021 के बीच सिरोंज जनपद में 5,923 संदिग्ध विवाह दर्ज कर प्रति हितग्राही 51 हजार रुपये के हिसाब से करीब 30.18 करोड़ रुपये की सहायता राशि वितरित किए जाने का मामला सामने आया है।

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनपद पंचायत के पूर्व सीईओ और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के रिश्तेदार आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी द्वारा मामले से जुड़े लोगों, दस्तावेजों और संपत्तियों की जांच की जा रही है।

फर्जीवाड़े के लिए बनाया गया था बाकायदा नेटवर्क

रिपोर्ट के अनुसार, विवाह सहायता योजना में कथित फर्जीवाड़े के लिए एक पूरा नेटवर्क तैयार किया गया था। इसमें त्रिपाठी ने सरकारी योजना के आवेदन के लिए लॉगिन आईडी और पासवर्ड दलालों तथा कंप्यूटर ऑपरेटरों को उपलब्ध कराए।

इसके बाद कथित तौर पर फर्जी आवेदन तैयार कर उन्हें पोर्टल पर दर्ज कराया जाता था। इस नेटवर्क में कई स्तरों पर लोगों के शामिल होने की बात जांच में सामने आई है।

5,923 संदिग्ध विवाहों के नाम पर हुआ भुगतान

जांच में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, 2019 से 2021 के बीच सिरोंज जनपद में 5,923 संदिग्ध विवाह दर्ज किए गए। इन मामलों में प्रति हितग्राही 51 हजार रुपये की दर से सरकारी सहायता राशि का भुगतान किया गया।

इस हिसाब से कुल राशि करीब ₹30.18 करोड़ बताई गई है। ED अब यह जांच कर रही है कि इन विवाहों में कितने वास्तविक थे और कितने मामलों में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी राशि निकाली गई।

  • अपात्र लोगों के दस्तावेज लगाकर आवेदन
    अपात्र व्यक्ति के दस्तावेज लगाकर आवेदन किया जाता था। आवेदन स्वीकृत होने के बाद सहायता राशि हितग्राही के खाते में पहुंचती थी और कथित तौर पर उसका एक हिस्सा सीडीओ तक पहुंचने का आरोप है।
  • एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम पर फाइल
    एक ही परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर भी आवेदन तैयार कर पोर्टल पर दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद बैंक खाते उपलब्ध कराकर राशि निकाली जाती थी।
  • बैंक खाते और दस्तावेजों का इस्तेमाल
    रिपोर्ट के अनुसार, खाताधारकों के दस्तावेज लेकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। इसके बाद राशि निकालने के लिए एटीएम और पासबुक कथित तौर पर दलालों के पास रहते थे।पहले से विवाहित महिलाओं के नाम पर आवेदन
    जांच में ऐसे मामलों का भी उल्लेख है, जिनमें ऐसी महिलाओं के दस्तावेज लगाए गए जिनकी शादी पहले ही हो चुकी थी। उनके नाम पर आवेदन तैयार कर सरकारी सहायता राशि निकालने का आरोप है।
  • पहले से विवाहित महिलाओं के नाम पर आवेदन
    जांच में ऐसे मामलों का भी उल्लेख है, जिनमें ऐसी महिलाओं के दस्तावेज लगाए गए जिनकी शादी पहले ही हो चुकी थी। उनके नाम पर आवेदन तैयार कर सरकारी सहायता राशि निकालने का आरोप है।
  • आवेदन नहीं किया, फिर भी राशि जारी
    कुछ ऐसे लोगों के नाम भी सामने आने की बात रिपोर्ट में कही गई है, जिन्होंने विवाह सहायता योजना के लिए आवेदन ही नहीं किया था। इसके बावजूद रिकॉर्ड में उनके नाम पर सहायता राशि जारी कर दी गई टेलर, कियोस्क ऑपरेटर और फेरीवालों तक नेटवर्क
  • मामले में कथित नेटवर्क केवल सरकारी कर्मचारियों या बिचौलियों तक सीमित नहीं था। रिपोर्ट में टेलर, कियोस्क ऑपरेटर और फेरीवालों तक नेटवर्क होने की बात कही गई है।
  • आरोप है कि नेटवर्क में शामिल लोग फर्जी विवाहों के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने से लेकर आवेदन प्रक्रिया और बैंक खातों के माध्यम से राशि निकालने तक की भूमिका निभाते थे।

कई दस्तावेज गायब होने का भी आरोप

रिपोर्ट के मुताबिक, फर्जी आवेदनों के लिए इस्तेमाल किए गए कई दस्तावेज बाद में गायब कर दिए गए। ED ने भोपाल ईओडब्ल्यू की FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।

बताया गया है कि ईडी ने त्रिपाठी, ऑपरेटर हेमंत और योगेंद्र शर्मा के खिलाफ केस दर्ज किया था। अक्टूबर 2025 में ED ने दोनों ऑपरेटरों के यहां जांच की थी। मामला बाद में सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा द्वारा विधानसभा में भी उठाया गया।

विधानसभा में भी उठा था मामला

इस कथित घोटाले को लेकर तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने जांच के आदेश दिए थे। रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर त्रिपाठी को गिरफ्तार किया गया था।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दोनों ऑपरेटरों को जेल भेजा गया था और करीब डेढ़ साल जेल में रहने के बाद रिहाई हुई। इसके बाद त्रिपाठी को जिला पंचायत हरदा में अटैच किए जाने की जानकारी दी गई है।

ED की जांच में क्या सामने आएगा?

अब ED की जांच का फोकस इस बात पर है कि विवाह सहायता योजना के तहत जारी की गई ₹30.18 करोड़ की राशि में कितनी राशि वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंची और कितनी राशि कथित फर्जीवाड़े के जरिए निकाली गई।

जांच एजेंसी कथित नेटवर्क में शामिल लोगों, बैंक खातों, दस्तावेजों, आवेदन प्रक्रिया और संपत्तियों के बीच संबंधों की भी जांच कर रही है।

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