भारतीय सनातन संस्कृति और परंपरा के जिस विचार धारा का प्रभाव इस भागवत कथा में झलक रही हैं

जिला शक्ति से रिपोर्टर रामकिशन चन्द्रा भारतीय सनातन संस्कृति और परंपरा के जिस विचार धारा का प्रभाव इस भागवत कथा में झलक रही हैं वह सरस्वती शिशु मंदिर के जनक विद्या भारती से ओत प्रोत है।यह अद्भुत एवम सुखद संयोग है कि उसके प्रतिनिधि व्यास पीठ पर विराजमान है तो वहीं यजमान के रूप में सरस्वती शिशु मंदिर के संचालक आसीन है तो वहीं आयोजन स्थल ग्राम पोरथा की धरती भी उसी राष्ट्रवादी सगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उद्गम स्थल है ,

बात अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने आज कथा मंच से व्यक्त करते हुए विद्या भारती परिवार के सदस्य होने के नाते खुद भी गौरवान्वित होने की बात कही।
व्यास पीठ आचार्य राजेंद्र महाराज ने इस अकिंचन भागवत कथा के तृतीय दिवस पर दक्ष प्रजापति की कथा वि सती की कथा सुनाते हुए बताया कि जब सती के यज्ञ कुंड में कूदनेवजेक्साथ ही देवाधिदेव महादेव की तंद्रा भंग हुई और वे क्रोधित होकर वीर भद्र को यज्ञ को भंग करने आदेश दिया और हाहाकार मच गई और देवता भोलेनाथ की विनती करने लगे तब भोले नाथ के आराधना स्वीकार करने के बाद ही यज्ञ संपन्न हुआ। पश्चात भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाते भगवान नरसिंह के द्वारा हिरण्य कश्यप वध को मनोरम झांकी के साथ प्रस्तुत किया। कथा मंच से गायत्री परिवार के भगत राम साहू ने लोगों से भारतीय सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए लोगों से सतत तत्पर रहने का आग्रह किया।
इन पलों में सरपंच मधु श्याम राठौर, गायत्री परिवार सक्ती से हीरानंद साहू, महेश साहू के डा मनोज राठौर, मोहित राठौर आदि ने अपने गरिमामय उपस्थिति के साथ व्यासपीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया।
उल्लेखनीय है कि सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय पोरथा व भागवत प्रवाह अध्यात्मिक सेवा संस्थान छ ग के सायुज्य में आयोजित कथा में लोगों की भीड़ कथा श्रवण के लिए उमड़ रही है तथा अलग अलग संगठनों के द्वारा प्रतिदिन पंडाल में प्रसाद की व्यवस्था की जा रहीं हैं जिससे आयोजकगण उत्साहित हैं।

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