छत्तीसगढ़ में भाजपा को जोर का झटका, वरिष्ठ कद्दावर नेता नंदकुमार साय का इस्तीफा
एंकर,,, छत्तीसगढ़ में भाजपा को जोरदार झटका लगा है

,,जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
दिलेसर चौहान संवाददाता छग
,,
भाजपा के कद्दावर आदिवासी नेता नंद कुमार साय ने भाजपा के प्राथमिक सदस्यता एवं सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है ।
जिससे भाजपा सन है, नंद कुमार साय ने सोशल मीडिया पर अपना इस्तीफा दिया, एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव को अपना इस्तीफा भिजवा दिया।
इससे पूरे प्रदेश में भाजपा सकते में हैं।
जिसकी कमी आदिवासी नेता के रूप में दूर-दूर तक नहीं है। भाजपा में इस वक्त काफी मायूसी छाई है उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उनकी छवि ,गरिमा, पर मिथ्या आरोप एवं
पार्टी की पदाधिकारियों द्वारा लगातार मेरे मान सम्मान को ठेस पहुंचाया है ।
जिससे मैं काफी आहत हूं ।छत्तीसगढ़ गठन से लेकर भाजपा को मजबूत करने में नंदकुमार साय का बहुत बड़ा योगदान रहा है।
पार्टी में ही मेरी छवि धूमिल करने की कोशिश की गई। साय ने 1977 से अपनी राजनीतिक शुरुआत की सीतापुर से 2बार विधायक बने रायगढ़ से 3 बार सांसद रहे ,इसके बाद राज्यसभा सदस्य एवं प्रदेश अध्यक्ष का कमान भी संभाले। साय को
अजीत जोगी के खिलाफ चुनाव लड़ा कर किनारे करने की कोशिश की गई।
भाजपा को छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को जोड़कर नई ऊंचाइयों प्रदान की थी।
उनकी मेहनत से ही आदिवासी बहुल इलाकों में भाजपा के समर्थन में कूद गई थी ।आदिवासी मुद्दे पर कई बार सकारात्मक निर्णय के पक्षधर रहे ,छत्तीसगढ़ बनने के बाद प्रतिपक्ष नेता बने ।
भाजपा के बहुमत में आने के बावजूद जब मुख्यमंत्री बनने का मौका आया तो अजीत जोगी मुख्यमंत्री के खिलाफ लड़ा कर उनका पत्ता काटने का प्रयास किया ।
पार्टी ने उन्हें किनारे कर दिया।
सरकार में मंत्री रहे ,अमरजीत भगत ने कहां की सरगुजा परिसीमन विधानसभा बात आई तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने गए। आदिवासी मुद्दे पर कांग्रेश के साथ रहे।
इनका सोच हमारी पार्टी से मेल खाती है।
वही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि साय का स्वागत है ।
जल्द ही सीएम भूपेश बघेल प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम से जल्द मुलाकात करेंगे । प्राप्त सूत्रों के अनुसार यह कद्दावर आदिवासी नेता
नंदकुमार साय जी ।
जल्द कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ में भाजपा दिल्ली में उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि मान मनोबल किया जा सके।
लगता नहीं कि लगता नहीं कि उन्हें मनाने में भाजपा को सफलता मिलेगी। उनके जैसा तेजतर्रार आदिवासी नेता दूर-दूर तक नहीं है।
वह एवं उनका अंदाज लोगों को ध्यान से सुनने पर मजबूर कर देता है ।आदिवासियों में उनकी एक अलग धमक है।

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