बीमारी से परेशान आदिवासी बुजुर्ग ने सुसाइड किया

वसीम कुरैशी रिपोर्टर

:प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- लापरवाही की गई होगी तो कार्रवाई की जाएगी,स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले का यह मामला

रायसेन।रायसेन जिले के सिलवानी में एक आदिवासी की मौत का कैरोसिन उड़ेलकर खुदकुशी किए जाने का मामला सामने आया है। यहां शुक्रवार देर रात पैर में इंफेक्शन से परेशान 66 साल के बुजुर्ग आदिवासी ने खुद पर केरोसिन डालकर आग लगा ली। इससे उसकी मौत हो गई।
इस मामले में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी ने विभाग से घटना की जानकारी ली है। उन्होंने कहा कि अगर लापरवाही की गई होगी तो कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सिलवानी से महज 4 किलोमीटर दूर जुनिया गांव के राजीव नगर टोला में रामचरण आदिवासी (पिता मुन्ना आदिवासी) ने अपने कच्चे मकान के आंगन में तेल डालकर खुद को आग के हवाले कर दिया।वह आग से सौ फीसदी झुलस गया था जिससे उसकी मौत हो गई थी।

मृतक का एक पुत्र (ब्रजेश) है, जिसका दो साल से कोई पता नहीं है। उसकी पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी है। वह घर में अकेले रहता था। घटना के बाद पड़ोसी दिनेश ने इस बात की सूचना पुलिस और उप सरपंच शफीक उद्दीन को दी।सिलवानी पुलिस ने शव को सिलवानी अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।सिलवानी थाने के एसआई अमरसिंह धाकड़ ने बताया कि पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही है।

उपसरपंच ने अस्पताल पहुंचाया था…..
ग्राम पंचायत जुनिया के उपसरपंच शफीक उद्दीन ने बताया कि पीड़ित के पड़ोसियों ने बुजुर्ग की पीड़ा देखकर करीब 10 दिन पहले 108 (एंबुलेंस) को फोन लगाया था।एंबुलेंस नहीं पहुंची ना कोई जवाब आया तो पीड़ित आदिवासी के पड़ोसी जगदीश और द्रोपती ने मुझे फोन पर इस बात की जानकारी दी। इसके बाद मैंने मौके पर पहुंच कर मैजिक ऑटो से रामचरण को सिलवानी के उप स्वास्थ्य केंद्र भेजा था। यहां कुछ दिन इलाज के बाद वह वापस घर पहुंचा और शुक्रवार की रात को उसने आत्महत्या कर ली।
जिला अस्पताल में मरीजों की रैफर करने की बनी परंपरा…..
शासकीय जिला अस्पताल में जब से शल्य चिकित्सक सर्जन डॉ दिनेश खत्री को प्रभारी सीएमचओ का प्रभार सौंपा है तब से कोई बड़े ऑपरेशन नहीं हुए हैं।आएदिन जिला अस्पताल से मरीजों को भोपाल भेजने की परंपरा सी बन गई है।जिससे मरीज और उनके परिजन बेहद परेशान हैं।युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष विकास शर्मा हर्ष वर्धन सोलंकी, रूपेश तन्तवार बताते हैं कि करोड़ों रुपये का बजट स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर फिजूल खर्च कर दिया गया है।अस्पताल में नाम का ट्रामा सेंटर बनाया गया है।जिला अस्पताल में बिना रुपये दिए मरीजों का इलाज मिलना असंभव है।सरकारी डॉक्टर अस्पताल में कम ड्यूटी बल्कि बंगलों, दुकानों में बैठकर जमकर दोहरी कमाई कर रहे हैं।स्वास्थ्य मंत्री भी प्रायवेट प्रैक्टिस पर रोक को लेकर कोई एक्शन नहीं लेते।इसीलिए वह बेख़ौफ होकर कमाई करने में जुटे हुए हैं।

नसीम खान संपादक

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