कड़कड़ाती ठंड में महीनो से अनशन में बैठे ग्रामीणों के बीच नही पहुंचा प्रशासन का कोई नुमाइंदा आर पार के मूड में आए रसपुर के ग्रामीण

लोकेशन शहडोल Beohari
रिपोर्टर दीपक कुमार गर्ग

कड़कड़ाती ठंड में महीनो से अनशन में बैठे ग्रामीणों के बीच नही पहुंचा प्रशासन का कोई नुमाइंदा आर पार के मूड में आए रसपुर के ग्रामीण

वंसिका के रेत खनन को लेकर विगत एक माह से अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन पर बैठे रशपुर के ग्रामीणों के बीच आज तक न तो शासन न ही प्रशासन का कोई नुमाइंदा ग्रामीणों के बीच पहुंचकर कर उनकी समस्यायों का अवलोकन करने का प्रयास किया ग्रामीणों ने विगत माह जिला कलेक्टर को ज्ञापन देते हुए बताया था की रेत खनन से लगभग 20 गांव के कृषकों की कृषि भूमि आगामी मानसून सत्र में कटान होकर नदी में समाहित हो जायेगी वही नदी किनारे बसे गांवों का भूजल स्तर में भी तेजी से गिरावट होता जा रहा है जिस पर कलेक्टर शहडोल के निर्देशन में खनिज विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण कर अपनी जांच प्रतिवेदन जिला कलेक्टर को सौंपा था लेकिन खनिज विभाग के प्रतिवेदन के बाद भी आज तक किसी भी तरह से रेत खनन पर कार्यवाही नही हो सकी जिससे प्रतीत हो रहा है की मानो अब जिले में वंसिका के कायदों पर ही खनन नीति लागू होगी ग्रामीणों की समस्यायों से प्रशासन को कोई सरोकार नहीं रहा पुष्पेंद्र पटेल जिला पंचायत सदस्य के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रभारी मंत्री से लेकर सूबे के मुख्यमंत्री तक को ज्ञापन सौंपा लेकिन कार्यवाही होने के बजाय अब प्रशासन ग्रामीणों की आवाज को कुचलने का प्रयास कर रही है क्युकी जिस तरह से पुलिस प्रशासन द्वारा शांति पूर्ण धरना दे रहे जिला पंचायत सदस्य पुस्पेंद्र पटेल को 3 घंटे थाना में बैठा कर उनका फोन जप्त कर लिया जाता है कही न कही लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन हो रहा क्युकी लोकतंत्र में शांति पूर्ण तरीके से हर नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है लेकिन उन्ही लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत इन दिनों प्रशासन अपना रवैया अपना हुए है मीडिया से बातचीत करते हुए आंदोलनकारियों ने बताया की अगर दो दिन में प्रशासन द्वारा हमारी मांगो पर गंभीरता नही दिखाई तो अब सड़क पर उतर कर सड़के जाम करेगे क्युकी एक माह से ज्यादा समय हो जाने के बाद भी प्रशासन ने गंभीरता नही दिखाई जिससे साफ जाहिर होता है कि इन दिनों संपूर्ण प्रशासन वंशिका के कायदों के आगे नत मस्तक होकर वंसिका के गोद में पल रहे है अगर समय रहते प्रशासन ने उक्त आंदोलन को शांत नही किया तो आने वाले दिनों में प्रदर्शन कारी एवम प्रशासन के बीच कड़ी टकराव की स्थित निर्मित होगी जो कानून व्यवस्था के लिए भी चुनौती होगी क्युकी उक्त धरना प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला एवं कृषक वर्ग सामिल है वही आगामी कुछ माह बाद चुनावी बिगुल का आगाज भी हो जायेगा जिससे सत्ता दल को इन ग्रामीणों की क्रोध का भी सामना करना पड़ेगा अब देखना होगा की क्या ग्रामीणों को अब सड़क तक जाना पड़ेगा या फिर प्रशासन स्तर से कोई ठोस कदम उठाए जाते है

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