जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
संवाददाता,,दिलेसर चौहान
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,,छत्तीसगढ़ के संकल्प, एक कार्यकर्ता का सम्मान को
पदम श्री से सम्मानित किया। जब प्रदेश में कोरोना फैला, और मोदी जी के वैक्सीन की सुविधा उपलब्ध कराई गई ,उस समय बिरहोर लोगों के मन में यूं कहें तो छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में लोगों के मन में वैक्सीन को लेकर आसंकाऐ थी ।
और प्रशासन के अनेक बार निवेदन करने पर भी उन्होंने वैक्सीन लेने के लिए मना करदिया है उसी समय जागेश्वर यादव को इसके लिए बिरहोरों को मनाने के लिए भेजा गया
और बिरहोर उनको अपना मसीहा मानते हैं ।
जागेश्वर यादव ने लोगों से आगरा किया तो सब तैयार हो गए ।
उनके दिलों में उनके प्रति जो विश्वास है ।एक गहरी पैठ है
पाली विकासखंड में उन्होंने तीन कार्यक्रम कराए ।
आपको बता दें कि पिछले दूर दराज आंचल में जागेश्वर यादव के प्रयासों से न केवल बिरहोर लोक शिक्षा से जुड़े ,उन्होंने खेती करना शुरू किया ।जो बिरहोर भिक्षावृत्ति से जुड़े थे ,वह आज धान की फसल लग रहे हैं ।
जीवन के मुख्य धारा में आकर संपन्न जीवन जी रहे हैं ।
जागेश्वर यादव धरमजयगढ़ में आश्रम भी आरंभ किया।
उनको पदम श्री मिलने पर वीरहोरो में भी काफी खुशी का माहौल दिखाई दे रहा है।
यह जनजाति के बिरहोर समाज लिए गौरव की बात है।
कुछ साल पहले इतने संकुचित दायरे में थे।
कि जूते चप्पल पहने हुए किसी को आता देखकर भाग जाते थे। उन्हें विकास की मुख्य धारा में शामिल करने जागेश्वर यादव ने जीवन भर जूते चप्पल नहीं पहनने का संकल्प किया ।
ताकि वे मिलने से शंकुचाय नहीं। यादव ने धीरे-धीरे बड़ा बदलाव लाने में कामयाब हो गए ।
और अभी बिरहोरों की पहली पीढ़ी शिक्षित हो गई है।
और शासन प्रशासन के लाभ ले रहे जागेश्वर यादव 21 वर्ष के थे तो उन्होंने अपनी समाज के दैनिक स्थिति उनकी दुर्दशा देखकर उनकी सेवा का संकल्प लिया जो आज भी जारी है ।
आज 4 दशक हो गए आज भी सेवा करते हुए चल रहे हैं, उनकी सेवा समाज को मुख्य धारा में लाने प्रयासत को देखते हुए मुख्यमंत्री सायं ने पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया।
नसीम खान






