जीते जी कोई इंसान, किसी समुदाय के लिए मसीह कैसे बन जाते है,

,जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
संवाददाता ,,दिलेसर चौहान

ऐसी विलक्षण घटना सर्दियों में कभी-कभी देखने में आती है इस वंचित समाज का कहना है राजा राम, नहीं तो भगवान से काम भी नहीं
कोंडागांव बस्तर का यह मामला भी कुछ ऐसा ही है।
बस्तर तथा छत्तीसगढ़ का एक सबसे प्राचीन परंतु सबसे पिछड़े गरीब एवं वंचित समुदाय है गांडा,।
जिसे हम चौहान ,अंकुरित,गढ़वा, गंधर्व नाम से भी जानते हैं।
छत्तीसगढ़ तथा कुछ एक अन्य राज्यों में भी यह जनजाति समुदायों के साथ ही सदियों से पाए जाने वाला एक प्राचीन गांडा,। समुदाय है। आपको बता दें कि
बस्तर तथा देश की जनजातियों पर तो सैकड़ो हजारों शोध हुए हैं, किंतु अनुसूचित जाति में वर्गीकृत, इस वंचित समुदाय पर आज तक किसी ने ध्यान नहीं दिया ।
और यह समाज (गांडा) जीवन के हर क्षेत्र में पिछड़ कर विलुप्त की कगार पर है।
राजाराम त्रिपाठी ने शोधकर उनके गौरव शैली इतिहास को खंगाल कर उनके सामने रख दिया।
उन्होंने प्रमाणित करते हुए, शोध पर किए गए मंथन पर कहा कि गांडा जाति ,एक गौरवशाली, शूरवीर ,कला ,मर्मज्ञ, शिल्प कला, में निपुण एक महान जाती रही है।
आजादी के तुरंत बाद त्रुटि वस अथवा षड्यंत्र वंश या फिर वोट की तुच्छ राजनीति के चलते इस समुदाय को अनुसूचित जाति में वर्गीकृत करते हुए, उनके सामाजिक स्थिति को एकदम से नीचे गिरा दिया।
इसी कारण यह समाज, आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर अंतिम पड़ाव पर है। इस शोध से पूरे गांडा समाज में राजा राम त्रिपाठी जी की स्वागत सत्कार की जा रही है।
इसीलिए वह इस समाज की मसीहा बन गए।
जैसे ही 5 तारीख को डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी जब
माननीय गवर्नर विभूषण हरि चंदन, माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव जी, वन विभाग जलवायु परिवर्तन जल संसाधन सहकारिता सहित तथा कई विभागों के कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप जी, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष तथा
जगदलपुर के एमएलए किरण देव जी तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज श्रीवास्तव।
के कर कमल से गाना समाज पर की गई प्रथम पिएचडी की उपाधि लेकर जब कुंडा गांव पहुंचे तब नगर सीमा पर हजारों की संख्या में अंधकुरी गाड़ा ,समाज के स्त्री पुरुषों बूढ़े बच्चों ने एकत्र होकर परंपराईक बाजा के साथ के डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी की अगवानी की।
समाज की महिलाओं ने परंपरागत तरीके से पैर धोकर आरती कर अक्षत टिका लगाकर स्वागत किया ।
डॉक्टर त्रिपाठी को सैकड़ो पुष्प मालाओं से लाद दिया
तथा फूलों की वर्षा करते हुए मुख्य मार्ग से एक्शन हाल तक मानव श्रृंखला की बीच ले गए। यह दृश्य देखने से पता चलता है गांड़ा ,चौहान ,जीवन के हर क्षेत्र में पिछड़े हुए हैं। जबकि इतिहास बताता है यह शूरवीर, योद्धा, कलाकृति, कलाकार रहे हैं आज उसके जीवन पर प्रश्न चिन्ह लग गया है
मगर यह सोध से इस समाज में बेचैनी और छटपटाहट नजर आ रही है क्योंकि इस शोध से आईने की तरह उनके समाज की वीर गाथा उनके जीवन चरित्र,
उन पर षडयंत्र पूर्वक की गई उन्हें समझ में आने लगा है कि हम क्या थे ,और आज क्या है ।
इस उपेक्षित गांडा,चौहान
समुदाय को डॉक्टर त्रिपाठी की द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों की चर्चा पिछले कुछ वर्षों से बौद्धिक समाज में चल रही थी।
डॉक्टर त्रिपाठी ने 1741 से लेकर आज तक गांडा समाज की सामाजिक आर्थिक संरचना तथा परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों का ऐतिहासिक मूल्यांकन किया है। उन्होंने इस वंचित पिछड़े समाज की आंखें खोल दी है उनके अंदर मायूसी की जगह एक एनर्जी ऊर्जा , भर दी है जो भविष्य में इसका परिणाम नजर आएगा।

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