नसीमखान
सांची,,, वैसे तो इस क्षेत्र में हलाली बांध किसानों की उपज उगाने आवश्यकता नुसार नहरों के माध्यम से पानी खेतों तक पहुंचाता है तथा हर वर्ष नहरों की सफाई के नाम पर लाखों रुपए का चूना सरकार को लगाया जाता है परन्तु नहरों की सफाई नहीं हो पाती जिससे किसानों को अपनी फसल उगाने पानी के लिए सिंचाई विभाग के कर्मचारियों की जीहुजूरी करने पर मजबूर होना पडता है ।
जानकारी के अनुसार जिन किसानों के कंधों पर फसलें उगाकर देश के लोगों चाहे वह राजनीतिक हो अथवा व्यसायी एवं मजदूर हो अथवा अमीर सभी के पेट भरने अनाज उगाकर देता है किसान रात दिन चाहे गर्मी बरसात सर्दियां हो अपनी जान की परवाह किये बगैर कडी मेहनत करता है ।इसके साथ ही आवश्यकता अनुसार जब उसे बिजली की आवश्यकता होती है तब वह मंडल के मनमाने दामों का शिकार होता है ऐसा ही इस क्षेत्र में किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने सिंचाई विभाग ने हलाली बांध से रायसेन विदिशा जिले में नहरों का जाल तो बिछा दिया जिससे खेतों तक आसानी से आवश्यकता नुसार पानी पहुंचाया जा सके ।इसके बदले में किसानों से पानी का मनमाना पैसा भी वसूला जाता है जबकि इन नहरों के माध्यम से पानी पहुंचाने के पहले नहरों की सफाई व्यवस्था जुटाई जाती हैं जिससे क्षेत्र भर के किसानों को सुविधाजनक रूप से पानी खेतों तक पहुचाया जा सके ।बताया जाता है कि हर वर्ष नहरों में पानी छोडऩे के पहले उनकी सफाई के नाम पर सरकार को लाखों रुपए का चूना तो लगा दिया जाता हैं परन्तु सफाई नही हो पाती जिससे फसलों के समय किसानों के खेतों में पानी न पहुंचने पर परेशानी उठानी पड़ती है तथा सिंचाई विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की जी हुजुरी के लिए मजबूर होना पडता है तथा पानी के पूर्ति न होने पर भी पानी का पैसा चुकाने पर मजबूर होना पडता है तथा किसानों को अपनी उपज के दाम भी नही मिल पाते ।किसानों को उनकी उपज उगाने भारी मशक्कत करनी पड़ती हैं इन किसानों की समस्या के लिए न तो प्रशासन न ही शासन द्वारा ही कदम उठाए जाते है जिससे किसानों की समस्या समय पर हल हो सके ।किसानों को सुविधाएं एवं नहरों से पानी देने नहरों की सफाई के नाम पर लाखों रुपए की सरकार की राशि डकारने पर कभी कोई कार्यवाही ही हो पाती है ।तथा सफाई के नाम पर सरकारी राशि का बंदरबाट का खेल चलता रहता है ।






