नसीमखान
सांची,, विश्वप्रसिद्ध बौद्ध नगरी सांची, जो अपने ऐतिहासिक महत्व और पर्यटन के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान रखती है, आजकल शराब माफियाओं के कारण नकारात्मक सुर्खियों में है। कभी इस पवित्र स्थल पर एकमात्र शराब दुकान हुआ करती थी, लेकिन समय के साथ अब दो शराब दुकानों के संचालन ने इस शांत स्थल के माहौल को पूरी तरह बदल दिया है।
जानकारी के अनुसार इस स्थल पर शराब माफिया का दबदबा इतना है कि वे बेधड़क पूरे क्षेत्र में शराब की आपूर्ति करते हैं। नियम-कायदों की परवाह किए बिना मनमाने दाम वसूले जाते हैं और दुकानों पर मूल्य सूची तक नहीं लगाई जाती। हाल ही में एक ग्राहक द्वारा अधिक मूल्य वसूलने पर विरोध किए जाने के बाद पैसा लौटाया गया, लेकिन यह घटना पूरे तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है।
नियम ताक पर, कार्रवाई नदारद।
शासन द्वारा शराब बिक्री पर स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं, जैसे कि राष्ट्रीय राजमार्ग से 300 मीटर की दूरी पर ही दुकान संचालित की जा सकती है। इसके बावजूद सांची की दोनों शराब दुकानें हाईवे से सटी हुई हैं। इससे न केवल यातायात बाधित होता है बल्कि सड़क किनारे शराबियों की भीड़ के चलते जाम और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
शराब के नशे में धुत लोगों द्वारा राहगीरों, खासकर महिलाओं पर अशोभनीय टिप्पणियां की जाती हैं, जिससे स्थानीय जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कई बार विवाद की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और आबकारी विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
त्योहारों में भी सक्रिय रहता है अवैध कारोबार।
तीज-त्योहारों पर जब शराब बिक्री पर रोक लगाई जाती है, तब भी यह माफिया पीछे नहीं हटता। पिछले दरवाजे से शराब की आपूर्ति जारी रहती है, जो इस बात का संकेत है कि संबंधित विभागों की भूमिका संदेह के घेरे में है।
ऐतिहासिक धरोहर को धूमिल करता नशे का कारोबार।
बौद्ध धर्म की शांति और संयम की शिक्षा देने वाले इस धार्मिक स्थल की छवि पर शराब माफिया का यह खुला खेल बट्टा लगा रहा है। जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव धार्मिक स्थलों पर शराब बंदी की घोषणा कर चुके हैं, वहीं सांची में इस पर अमल की प्रतीक्षा की जा रही है।
शराब विरोधी संगठनों और स्थानीय नागरिकों की मांग है कि सांची जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थल को नशे के कारोबार से मुक्त किया जाए और शराब दुकानों को यहां से हटाया जाएगा।






