नसीमखान
सांची,,, ऐतिहासिक व विश्वप्रसिद्ध सांची नगर को सुंदर बनाने के उद्देश्य से शासन एवं नगर परिषद द्वारा कई योजनाएं लागू की गईं। इन्हीं प्रयासों के तहत आगंतुकों के स्वागत हेतु लाखों रुपये खर्च कर भोपाल व विदिशा की ओर नगर सीमा पर भव्य स्वागत द्वारों का निर्माण कराया गया था।
लेकिन आज ये स्वागत द्वार प्रशासन की उपेक्षा का शिकार होकर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। नगर में प्रवेश करते ही आगंतुकों का स्वागत अब केवल सड़क किनारे खड़े कुछ जर्जर पोल ही करते हैं, जो इन द्वारों के कभी अस्तित्व में होने की गवाही देते हैं।
सूत्रों के अनुसार इन द्वारों के निर्माण पर नगर परिषद द्वारा करीब 25 लाख रुपये खर्च किए गए थे। तब भी निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे, लेकिन कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। परिणामस्वरूप कुछ ही समय में ये द्वार क्षतिग्रस्त होकर गिर गए, और प्रशासन ने इसकी कोई सुध नहीं ली।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि इन द्वारों में प्रयुक्त सामग्री कहां गई, इसका भी कोई हिसाब नहीं है। न ही कोई मरम्मत, न ही कोई जांच। ऐसे में यह मामला सिर्फ उपेक्षा नहीं, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी संकेत करता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि यही राशि नगर की सड़कों, नालियों या मूलभूत सुविधाओं पर खर्च की जाती, तो वास्तव में नगरवासियों को लाभ मिलता।
आज जबकि नगर को “स्वच्छ एवं सुंदर” बनाने की बात बार-बार दोहराई जाती है, वही प्रशासन अपने पुराने कार्यों की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं दिखता। इससे साफ है कि नगर की सुंदरता की मुहिम केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है।अब सवाल उठता है कि स्थानीय प्रशासन क्या इन बदहाल स्वागत द्वार की ओर देखने की जहमत उठा पायेगा।






