नसीमखान
पेयजल पाइपलाइन और नाला निर्माण की लापरवाही उजागर, पर्यटक स्थल की छवि को भी नुकसान
सांची।। क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने नगर का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। नगर की अधिकतर सड़कें पानी से लबालब हैं और जगह-जगह बने गड्ढों ने राहगीरों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। नालों के अधूरे निर्माण और सड़कों पर फैली मिट्टी ने कीचड़ का रूप लेकर स्थिति को और भी बदतर बना दिया है।
प्रशासन को हर वर्ष की तरह इस बार भी बारिश के साथ ही पेयजल पाइपलाइन फूटने और उसकी मरम्मत की याद आई है। बारिश से पहले शुरू हुए नाला निर्माण की धीमी रफ्तार और अधूरे काम ने जलभराव की समस्या को बढ़ाया है। मिट्टी हटाने के निर्देश तो दिए गए, लेकिन आधा-अधूरा काम लोगों के लिए आफत बन गया। नालियों के किनारे की मिट्टी अब दलदल का रूप ले चुकी है।
नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए नगर परिषद सीएमओ को सख्त निर्देश दिए थे कि सड़कों से तुरंत मिट्टी हटाई जाए। निर्देश के बाद आनन-फानन में मिट्टी हटाने की खानापूर्ति तो हुई, लेकिन सही ढंग से सफाई न होने के कारण राहगीरों को अब भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
नाला निर्माण के पहले वाटर प्लांट कंपनी द्वारा घर-घर पेयजल आपूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाने का काम किया गया था। लेकिन अब उसी पाइपलाइन के बार-बार फूटने से सवाल उठने लगे हैं—क्या गुणवत्ता के साथ कोई समझौता हुआ? बारिश के बीच अब फिर से जेसीबी मशीनें सड़कों की खुदाई में लगी हैं, जिससे और गड्ढे उभर आए हैं। यह काम बारिश पूर्व भी किया जा सकता था।
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अध्यक्ष रेवाराम ने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर कार्य में तेजी लाने की कोशिश की है। फिर भी सच्चाई यही है कि भारी बारिश ने नगर में विकास की पोल खोलकर रख दी है।
जल निकासी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं
नगर के प्रमुख स्थान जैसे स्तूप रोड और अस्पताल परिसर में पानी भरना अब आम बात हो गई है।इसके साथ ही बसस्टैंड परिसर में ब्लॉक तो लगवा दिये गए परन्तु यह ब्लाक भी जगह जगह पानी में डूबे नजर आ रहे है जिससे यहां दुकानदारों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही हैं लेकिन प्रशासन इस पर चुप्पी साधे बैठा है। न तो कोई ठोस प्रबंधन नजर आता है, न ही किसी प्रकार की तत्परता।
पर्यटक भी हो रहे परेशान
सांची विशेष दर्जा प्राप्त एक विश्वविख्यात पर्यटन स्थल है, जहां देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। लेकिन नगर की जर्जर और जलमग्न सड़कों से गुजरना न केवल स्थानीय नागरिकों बल्कि पर्यटकों के लिए भी त्रासदी बन चुका है। इससे सांची की पर्यटन छवि भी प्रभावित हो रही है।
नगर की वर्तमान स्थिति यह सवाल उठाती है कि क्या हर बार बारिश आने के बाद ही प्रशासन जागेगा? क्या विकास कार्य केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगे। इस मामले में जब सीएमओ रामलाल कुशवाहा से फोन पर संपर्क करना चाहा तो हमेशा की तरह उन्होंने फोन उठाने की जहमत नहीं की ।तब आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिम्मैदारो को इस नगर की प्रसिद्धि से कोई सरोकार नहीं दिखाई देता है ।






