नसीमखान
सांची,,बरसात के आगमन के साथ ही किसानों की व्यस्तता भी शुरू हो गई है। खेतों में पानी पहुंचते ही किसान अपनी धान की फसल की तैयारियों में जी-जान से जुट गए हैं। कोई स्वयं और अपने परिवार के साथ खेतों में मेहनत कर रहा है, तो कोई मजदूरों की सहायता लेकर खेती कार्य को अंजाम दे रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बारिश के पहले झोंकों के साथ ही किसानों ने खेतों में गड्ढे बना कर पानी भरना शुरू कर दिया है। जहां वर्षा का जल पर्याप्त नहीं पहुंचा, वहां किसान ट्यूबवेल का सहारा ले रहे हैं। धान की फसल को सबसे मेहनत वाली खेती मानी जाती है, जिसमें दिन-रात की मेहनत और धैर्य की आवश्यकता होती है। किसान रात-दिन खेतों में डटे रहते हैं, वहीं मजदूरों की कमी के चलते कई किसान दूर-दराज से श्रमिक बुलवाकर काम करा रहे हैं।
सांची सहित क्षेत्र के कई गांवों में इन दिनों खेतों में ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट गूंज रही है। पहले ट्रैक्टर से खेत जोते जाते हैं, फिर पानी भरकर ‘मचाई’ की जाती है। इसके बाद धान के पौधों की रोपाई का सिलसिला शुरू होता है, जो अधिकांश किसान स्वयं या मजदूरों की मदद से संपन्न करते हैं।
धान की इस तैयारी के दौर में गांव की चहलपहल खेतों तक सिमट जाती है, जबकि बाजारों में सन्नाटा छा जाता है। कई गांवों में तो दिन भर बाजार सूने नजर आते हैं क्योंकि अधिकांश ग्रामीण खेतों में व्यस्त रहते हैं।
बारिश के साथ ही किसानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है, लेकिन यह मुस्कान मेहनत और तपस्या से भरी होती है। किसान न दिन देखते हैं, न रात; न कीचड़ की परवाह करते हैं, न भूख-प्यास की। बस एक ही लक्ष्य—अच्छी फसल की उम्मीद के साथ खेत में जुटे रहना।
कमलकिशोर पटेल, किसान, ने बताया, “धान की खेती में बहुत मेहनत लगती है, लेकिन यह हमारे जीवन का आधार है। जैसे ही पानी आया, हम लोग तुरंत खेतों में उतर गए। इस बार अच्छी फसल की उम्मीद है।”
वहीं जवाहर सिंह चौहान ने कहा, “मजदूरों की भारी कमी है, हमें दूर-दराज से मजदूर बुलाने पड़ते हैं। खुद भी दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन अगर बारिश ठीक रही तो मेहनत जरूर रंग लाएगी ।






