नसीमखान
सांची,,
नगर में आवारा पशुओं की समस्या लगातार विकराल रूप लेती जा रही है। अब तो साप्ताहिक हाटबाजार जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्र भी इन आवारा सांडों के आतंक से अछूते नहीं हैं। हर गुरुवार को लगने वाले इस हाटबाजार में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय नागरिक एवं आसपास के ग्रामीण खाद्य सामग्री और अन्य वस्तुओं की खरीदारी करने आते हैं, लेकिन यहां फैली अव्यवस्था और सुरक्षा अभाव के बीच आवारा सांडों का विचरण लोगों के लिए खतरे का कारण बनता जा रहा है।
बारिश के चलते वैसे ही सड़कों की स्थिति खराब है, ऊपर से इन सांडों की मौजूदगी ने राहगीरों, दुकानदारों और खरीदारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई बार ये सांड भीड़ में घुसकर दुकानों पर मुंह मार देते हैं, जिससे दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ता है। सब्जी विक्रेता काशीराम ने बताया, “सांड सब्जी की दुकान पर आ जाते हैं, इन्हें भगाने में ग्राहकों की बिक्री भी प्रभावित होती है।” वहीं, फल विक्रेता सुरेंद्र का कहना है, “सांडों से काफी परेशानी हो रही है, लेकिन इन पर कोई नियंत्रण नहीं हो पा रहा।”
स्थानीय व्यापारी बताते हैं कि ये सांड न केवल डर का कारण बने हुए हैं, बल्कि आपस में भिड़ जाने पर स्थिति और भी भयावह हो जाती है। सड़क पर इनके जमावड़े से वाहन चालकों को भी भारी असुविधा होती है। कई बार दुर्घटनाएं होते-होते टल चुकी हैं।
चिंताजनक बात यह है कि पूर्व में इन सांडों के हमलों में कई लोग घायल भी हो चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक अमला इस समस्या पर ध्यान देने को तैयार नहीं दिख रहा। नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद और प्रशासन के पास न तो सड़कों से इन्हें हटाने की योजना है और न ही कोई वैकल्पिक समाधान।
नगरवासियों ने एक बार फिर प्रशासन से मांग की है कि साप्ताहिक हाटबाजार और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर आवारा सांडों पर नियंत्रण के लिए ठोस कार्रवाई की जाए, ताकि जनसुरक्षा सुनिश्चित हो सके और व्यापारी निश्चिंत होकर अपने कार्य में लगे रह सकें।






