नसीमखान सांची
सांची — विश्व प्रसिद्ध बौद्ध पर्यटन स्थल सांची जहां विकास कार्यों की गूंज अक्सर सुनाई देती है, वहीं मूलभूत यातायात सुविधाओं के अभाव ने विकास के दावों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। करोड़ों की लागत से बने बसस्टैंड पर आज तक बसों का ठहराव शुरू नहीं हो सका, जिससे यात्रियों को राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। यह स्थिति उनकी सुरक्षा के लिए भी खतरा बनी हुई है।
उधर, सांची रेलवे स्टेशन को आधुनिक स्वरूप में विकसित करने पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन अब भी अधिकांश ट्रेनों का यहां ठहराव नहीं है। पर्यटक भोपाल या विदिशा उतरकर अतिरिक्त खर्च में सांची पहुंचने को मजबूर हैं।
हालांकि नगर में सिविल अस्पताल का आधुनिकीकरण, सीएमराइज स्कूल की स्थापना, नया थाना भवन, नगर परिषद का नवनिर्मित कार्यालय और सड़कों का सुधार कार्य उल्लेखनीय उपलब्धियां हैं, परंतु यातायात सुविधाओं के बिना इन विकास कार्यों का लाभ नागरिकों और पर्यटकों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है।
सवाल अब यह है कि सांची जैसे विश्व विख्यात स्थल को “सुविधा विहीन विकास” का प्रतीक क्यों बनाया जा रहा है?






