नसीमखान सांची
सांची,,,ढाई हजार वर्ष पुरानी बौद्ध विरासत को संजोए विश्वप्रसिद्ध नगर सांची आज मूलभूत रोशनी जैसी आवश्यक सुविधा के लिए संघर्ष कर रहा है। सांची स्तूप की ख्याति देश-विदेश में है, लेकिन विडंबना यह है कि यही नगर रात होते ही अंधेरे की गिरफ्त में समा जाता है। इससे न केवल स्थानीय नागरिकों बल्कि देशी-विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।
राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर लाखों रुपये की लागत से स्थापित की गई स्ट्रीट लाइट व्यवस्था अब बदहाल नजर आ रही है। कई स्थानों पर तार टूटे पड़े हैं, पोल टेढ़े-मेढ़े खड़े हैं और रोशनी के स्थान पर घुप्प अंधेरा पसरा रहता है। स्थिति यह है कि वीआईपी आगमन की सूचना मिलते ही आनन-फानन में व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाती है, लेकिन सामान्य दिनों में पूरी व्यवस्था ठप्प दिखाई देती है।
नगर परिषद अध्यक्ष ने जताई नाराजगी
नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नगर परिषद की ओर से कई बार एनएच के अधिकारियों तथा विद्युत मंडल के जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से बिजली व्यवस्था सुचारू कराने का अनुरोध किया गया है, लेकिन अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।
उन्होंने कहा कि अंधेरे के कारण नगरवासियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है और पर्यटन नगरी की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो उच्च स्तर पर मामला उठाया जाएगा।
बिजली आपूर्ति भी अनियमित।
नगर में विद्युत आपूर्ति का ढर्रा भी अनिश्चित बना हुआ है। बिजली कब आए और कब चली जाए, इसका कोई निश्चित समय नहीं। उपभोक्ताओं में रोष बढ़ रहा है, जबकि विभागीय प्राथमिकताएं व्यवस्था सुधार से अधिक अन्य प्रक्रियाओं पर केंद्रित दिखाई देती हैं।
विश्व मंच पर पहचान रखने वाली सांची को अंधेरे से मुक्त करना अब केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नगर की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है।





