बरेली से अशोक सोनी
प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी रंगो उत्सव पर होली के अवसर पर नगर से श्रद्धालुओं का जत्था सम्मेद शिखर जी के लिए रवाना हुआ है हालांकि इस वर्ष विगत वर्ष के मान से इस वर्ष 25 महिला पुरुष श्रद्धालु रवाना हुए हैं जबकि विगत वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या अधिक थी।
यात्रा से पूर्व श्रद्धालुओं के द्वारा नगर में विराजमान मुनि प्रयोग सागर महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद लेकर यात्रा का शुभारंभ किया।
इस संबंध में यात्रा संयोजक संजय जैन ने बताया कि जैन तीर्थंकरों की तपस्या स्थली सम्मेद शिखर को जैन धर्म का सबसे प्रभावशाली तीर्थ माना जाता है। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष भी इसी सिद्ध भूमि से हुआ था।
वहीं इस संबंध में शैलेंद्र जैन शेलू भैया ने बताया सम्मेद शिखरजी जैन धर्म का सर्वोच्च और शाश्वत सिद्ध क्षेत्र है, जहाँ 24 में से 20 तीर्थंकरों सहित अनगिनत मुनियों ने मोक्ष प्राप्त किया है। यह स्थान अत्यंत पवित्र, साधना-स्थली और मोक्ष का द्वार माना जाता है, जहाँ की 27 किमी की वंदना आत्मिक शांति और पापों के क्षय का साधन है। उन्होंने कहा कि मोक्ष स्थली महातीर्थ जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि होने के कारण इसे ‘तीर्थराज’ कहा जाता है। इसमें भगवान पार्श्वनाथ की मोक्ष स्थली भी शामिल है यहाँ का कण-कण पूजनीय और पवित्र है। जिसको लेकर हम सभी तीर्थ यात्रियों के द्वारा इस पावन स्थल पर क्षेत्र की खुशहाली व समृद्धि की कामना करेंगे।





