नसीम खान सांची
सांची,,, विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगरी सांची में स्वच्छता के दावे भले ही बड़े-बड़े किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट दिखाई दे रही है। नगर के कई नाले-नालियां अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं, जिससे गंदगी फैलने के साथ-साथ मच्छरों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इससे स्थानीय लोगों में बीमारियों को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।
बताया जाता है कि शासन-प्रशासन द्वारा नाले-नालियों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए समय-समय पर अभियान चलाने की बात कही जाती रही है, लेकिन नगर में कई स्थानों पर अतिक्रमणकारियों ने नालों और नालियों पर कब्जा कर पक्के निर्माण तक कर लिए हैं। प्रभावशाली लोगों के सामने प्रशासन की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है।
इतना ही नहीं, नगर में बढ़ते अतिक्रमण का असर सड़कों पर भी दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर सड़कों की चौड़ाई सिमटकर गलियों जैसी हो गई है, जिससे आम नागरिकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर में फैली गंदगी से जहां वातावरण प्रदूषित हो रहा है, वहीं मच्छरों की बढ़ती संख्या से बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है। पहले कभी-कभार कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाता था, लेकिन लंबे समय से यह व्यवस्था भी ठप पड़ी बताई जा रही है।
ऐसे में विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल की छवि को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि नगर में स्वच्छता व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए और नाले-नालियों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए, ताकि लोगों को गंदगी और बीमारियों के खतरे से राहत मिल सके।
अब देखना यह है कि ऐतिहासिक नगरी की स्वच्छता और छवि बचाने के लिए प्रशासन कब ठोस कदम उठाता है।





