नसीमखान सांची
सांची,,,,क्षेत्र में इन दिनों गेहूं और चने की फसलों की कटाई जोरों पर चल रही है। कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई को जलाने की प्रवृत्ति पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही गिरते जलस्तर को ध्यान में रखते हुए नलकूप खनन पर भी रोक लगा दी गई है।
जानकारी के अनुसार, फसल कटाई के बाद किसान खेतों की सफाई के लिए नरवाई में आग लगा देते हैं। इससे न केवल भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है, बल्कि पशुओं के लिए चारे की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। इसके अलावा नरवाई में लगी आग कई बार आसपास के खेतों तक फैलकर खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाती है, जिससे अग्निकांड की घटनाएं बढ़ने की आशंका बनी रहती है। गांवों के समीप आग पहुंचने पर रिहायशी क्षेत्रों में भी खतरा बढ़ जाता है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने नरवाई जलाने पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही किसानों से अपील की गई है कि वे वैकल्पिक तरीकों से खेतों की सफाई करें।
जल संकट को लेकर भी सतर्क प्रशासन
गर्मी के बढ़ते प्रभाव के साथ ही क्षेत्र में जलस्तर तेजी से गिरने लगा है, जिससे आने वाले दिनों में पेयजल संकट गहराने की आशंका है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने नलकूप खनन पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है, वहीं कुछ मामलों में कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
प्रशासन की सख्ती जहां पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम है, वहीं किसानों के लिए जागरूकता और जिम्मेदारी की भी परीक्षा है।






