नसीमखान सांची
सांची,,,
खेतों में खड़ी नरवाई जलाने पर रोक लगाने के लिए प्रशासन भले ही सख्त आदेश जारी कर रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर ये आदेश बेअसर नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में लगातार नरवाई जलने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे आसमान में काले धुएं के गुबार छा रहे हैं और नगर सहित आसपास के घरों पर कालिख जमने लगी है।
जानकारी के अनुसार, फसल कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई पशुओं के लिए उपयोगी होती है। इससे जहां मवेशियों का पेट भरता है, वहीं कई किसान इससे भूसा भी तैयार कर लेते हैं। इसके बावजूद कुछ किसान खेतों की शीघ्र सफाई के लिए नरवाई में आग लगा देते हैं। परिणामस्वरूप न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि आसपास के गांवों में आग फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
नरवाई जलने से उठने वाले धुएं और कालिख के कारण नगरवासियों को सांस संबंधी समस्याओं सहित कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि घरों की छतों और आंगनों तक पर कालिख की परत जमने लगी है। खेतों में खडी नरवाई जलने से न केवल उपजाऊ क्षमता नष्ट होती हैं बल्कि खेतों में खडे हरेभरे पेड पौधे भी प्रभावित होते है।
गौरतलब है कि प्रशासन द्वारा नरवाई जलाने पर रोक के लिए कई बार चेतावनी जारी की जा चुकी है और दंडात्मक कार्रवाई के प्रावधान भी तय हैं। इसके बावजूद इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
इस मामले में क्या कहते है जिम्मैदार ।
नायब तहसीलदार ललित सक्सेना ने कहा कि नरवाई जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि कोई किसान ऐसा करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। तथा हम पता लगवा रहे है कि किन किन खेतों में किसके द्वारा आग लगवाईं जा रही है प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है तथा हम कार्यवाही करेंगे।
सख्ती के दावों के बीच यदि हालात नहीं सुधरे, तो यह लापरवाही बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।





