रिपोर्ट राजर्षि मिश्रा
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उमरिया जिले के ग्राम अमरपुर गौतम परिवार में आयोजित श्रीमती माया जगदीश प्रसाद गौतम जी के निवास पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा का गुरुवार को सम्पूर्ण हुई। शुक्रवार को हवन-यज्ञ में पूर्ण आहुति होगी और भंडारे का आयोजन किया जाएगा। अमरपुर मेन बाजार में श्रीमद् भागवत का सुन्दर चित्रण कर रहे कथाव्यास जगद्गुरु श्री श्री 1008 श्री स्वामी वल्लभाचार्य जी महाराज द्वारा सप्तदिवसीय अमृत रूपी श्रीमद् भागवत कथा श्रोताओं को रसस्वादन कराई तथा गुरूवार को अंतिम दिन सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए पंडाल में उपस्थित श्रोताओं को भाव-विभोर किया। श्री महराज ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि मित्रता करो, तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो। सच्चा मित्र वही है, जो अपने मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए ही मदद कर दे। आजकल स्वार्थ की मित्रता रह गई है। जब तक स्वार्थ सिद्ध नहीं होता है, तब तक मित्रता रहती है। जब स्वार्थ पूरा हो जाता है, मित्रता खत्म हो जाती है। श्री महराज ने कथा श्रवण करते हुए कहा कि समस्त पापो का नाश करने वाली कथा जिसके पठन , पाठन एवं श्रवण के ” पुण्य ” से समस्त पाप मिटने लगते है एवं जीवात्मा सदगति को प्राप्त होती है यानि पाप नाश के साथ ही सदगति भी ! अतः इस पुण्य कारी कथा का श्रवण एवं अनुकरण करे ! मृत आत्माओं के निमित्त इसके पाठ से उनका उद्धार होता है और पाठ करवाने वाले का पितर दोष शांत होता है !
श्रीमद्भागवत एक ज्ञान यज्ञ है। यह मानवीय जीवन को रसमय बना देता है। भगवन् कष्ष्ण की अद्भूत लीलाओं का वर्णन इसमें समाहित है। भव-सागर से पार पाने के लिये श्रीमद्भागवत कथा एक सुन्दर सेतु है।
ब्यास जी ने अपने पुत्र शुकदेव जी को श्रीमद्भागवत पढ़ायी, तब शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को जिन्हें सात दिन में मरने का श्राप मिला, उन्हें सात दिनों तक श्रीमद्भागवत की कथा सुनायी। जिससे राजा परीक्षित को सात दिन में मोक्ष की प्राप्ति हुयी।
निगमकल्पतरोर्गलितं फलं शुकमुखादमृतं द्रवसंयुतं।
पिवत भागवतं रसमालयं महुरसो रसिका भुविभावुकाः।।
श्रीमद्भागवत वेद रूपी वृक्षों से निकला एक पका हुआ फल है। शुकदेव जी महाराज जी के श्रीमुख के स्पर्श होने से यह पुराण अमृतमय एवं मधुर हो गया है। इस फल में न तो छिलका है, न गुठलियाँ हैं और न ही बीज हैं। अर्थात इसमें कुछ भी त्यागने योग्य नहीं हैं सब जीवन में ग्रहण करने योग्य है।
श्री वल्लभाचार्य जी महाराज ने कहा कि अमृत से भरे इस रस का पान करने से जीवन धन्य-धन्य हो जाता है। इसलिये अधिक से अधिक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिये। जितनी ज्यादा कथा सुनेंगे उतना ही जीवन सुधरेगा।
श्रीमद्भागवत कथा सुनने के अनन्त फल हैं/श्री वल्लभाचार्य जी महाराज।
श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मनुष्य को आत्मज्ञान होता है। भगवान की दिव्य लीलाओं को सुनकर मनुष्य अपने ऊपर परमात्मा की विशेष अनुकम्पा का अनुभव करता है।
श्रीमद्भागवत कथा करने से मनुष्य अपने सुन्दर भाग्य का निर्माण शुरू कर देता है। वह ईह लोक में सभी प्रकार के भोगों को भोग कर परलोक में भी श्रेष्ठता को प्राप्त करता है। मृत्यु के भय से दूर करती है एवं पित्र दोषों को शान्त करती है।
जिस व्यक्ति ने जीवन में कोई सत्कर्म न किया हो, सदैव दुराचार में लिप्त रहा हो, क्रोध रूपी अग्नि में जो हमेशा जलता रहा हो, जो व्यभिचारी हो गया हो, परस्त्रीगामी हो गया हो, यदि वह व्यक्ति भी श्रीमद्भागवत की कथा करवाये तो वह भी पापों से मुक्त हो जाता है।
जो सत्य से विहीन हो गये हों, माता-पिता से भी द्वेष करने लगे हों, अपने धर्म का पालन न करते हों, वे भी यदि श्रीमद्भागवत कथा सुनें तो वे भी पवित्र हो जाते हैं।
मन-वाणी, बुद्धि से किया गया कोई भी पापकर्म-चोरी करना, छद्म करना, दूसरों के धन से अपनी आजीविका चलाना, ब्रह्म-हत्या करने वाला भी यदि सच्चे मन से श्रीमद्भागवत कथा सुनले तो उसका भी जीवन पवित्र हो जाता है।
इस अवसर पर अभिषेक पाण्डेय प्रभु दयाल गौतम राम भूषणगौतम रामनरेश गौतम जगदीश प्रसाद गौतम अरविंदगौतम रामशरण गौतम वैदेहीगौतम रघुवर शरण सहित समस्त गौतम परिवार गांव एवं अगल-बगलसे कथा श्रवण करने पहुंचे हजारों की संख्या पर श्रद्धालु उपस्थित रहे।





