नसीमखान सांची
सांची,,,नगर में लगातार बढ़ते तापमान ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। सुबह से ही सूरज आग उगलने लगता है और दोपहर तक तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से हालात बेहद कठिन हो जाते हैं।
गर्मी के इस प्रकोप के चलते नगरवासी जहां घरों में रहने को मजबूर हैं, वहीं इस ऐतिहासिक स्थल पर आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक और दूरदराज से कामकाज के लिए पहुंचने वाले ग्रामीण सबसे अधिक परेशान हो रहे हैं। नगर में न तो पर्याप्त ठंडे स्थान उपलब्ध हैं और न ही शीतल जल की समुचित व्यवस्था, जिससे लोग राहत के लिए भटकते नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं प्यास की समस्या से पशु पक्षी भी प्रभावित हो रहे है नगर के कुछ पशु पक्षी प्रेमियों ने पशु पक्षियों के लिए भी पानी की व्यवस्था करने अपने घरों के आसपास व्यवस्था करने का आव्हान किया है।
नगर में लाखों रुपए की लागत से सौर ऊर्जा से संचालित प्याऊ स्थापित तो किए गए हैं, लेकिन भीषण गर्मी के बीच ये प्याऊ ठंडा पानी देने के बजाय गर्म पानी ही उगल रहे हैं, जिससे लोगों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में कई लोगों को होटलों के गर्म पानी से ही अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है।
वहीं, सड़क निर्माण के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के बाद अब तक नए पौधारोपण का वादा अधूरा है। इसके चलते नगर में छांव के प्राकृतिक साधन लगभग समाप्त हो चुके हैं। हर साल चलने वाले पौधारोपण अभियान भी जमीनी हकीकत से दूर नजर आते हैं।
जलस्तर में गिरावट के कारण नगर में जलप्रदाय भी सीमित कर दिया गया है, जिससे स्थानीय निवासियों के साथ-साथ बाहरी लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे अधिक दिक्कत किसानों को उठानी पड़ रही है, जो सुबह से ही अपनी उपज की तुलाई के लिए केंद्रों पर पहुंच जाते हैं। तेज धूप में लगाए गए टेंट भी नाकाफी साबित हो रहे हैं, जिससे किसानों की समस्या और बढ़ गई है।
ऐसे में सांची जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की कमी प्रशासनिक व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर रही है।
जब राहत के इंतजाम ही गर्मी बढ़ाने लगें, तो हालात की गंभीरता खुद-ब-खुद बयां हो जाती है।





