नसीम खान सांची
सांची — भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्य अर्हन्त सारिपुत्र और अर्हन्त महामोगल्यान के पवित्र अवशेष (अस्थियां) अब मंगोलिया में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखे जाएंगे। भारत सरकार द्वारा सांची स्थित बौद्ध स्तूप परिसर के चैतियगिरी विहार मंदिर में सुरक्षित रखे गए इन पवित्र अवशेषों को मंगोलिया ले जाने की अनुमति प्रदान की गई है।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय तथा मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के निर्देशानुसार गुरुवार को चैतियगिरी विहार मंदिर में विधिवत प्रक्रिया के तहत पवित्र अवशेष राष्ट्रीय संग्रहालय के प्रतिनिधियों को सौंपे गए। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, महाबोधी सोसायटी श्रीलंका के प्रमुख श्री वानगल उपतिस्स नायक थेरो तथा कलेक्टर श्री अरुण कुमार विश्वकर्मा उपस्थित रहे।
कलेक्टर श्री विश्वकर्मा ने पूर्ण सुरक्षा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत पवित्र अवशेष संस्कृति विभाग के निदेशक श्री यश सक्सेना को सौंपे। इस दौरान संपूर्ण प्रक्रिया का अभिलेखीकरण, वीडियोग्राफी एवं पंचनामा भी तैयार किया गया।
जानकारी के अनुसार पवित्र अवशेष भोपाल से हवाई मार्ग द्वारा दिल्ली पहुंचाए जाएंगे, जहां राष्ट्रीय संग्रहालय में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 29 मई को इन्हें मंगोलिया भेजा जाएगा। मंगोलिया के प्रसिद्ध गंडन तेगचेनलिंग मठ में इन पवित्र अवशेषों को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा जाएगा। इसके बाद 10 जून को अवशेष पुनः दिल्ली लाए जाएंगे तथा 11 जून को सांची स्थित चैतियगिरी विहार मंदिर में सुरक्षित यथास्थान स्थापित किए जाएंगे।
इससे पूर्व चैतियगिरी विहार के तहखाने से पवित्र अवशेषों को विधिवत पूजा-अर्चना के साथ बाहर लाया गया। मंदिर परिसर में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई तथा अवशेषों को बाहर लाते समय गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
इसके पश्चात महाबोधी सोसायटी श्रीलंका के प्रमुख श्री वानगल उपतिस्स नायक थेरो एवं संस्कृति विभाग के निदेशक श्री यश सक्सेना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच पवित्र अवशेषों को लेकर भोपाल के लिए रवाना हुए। इस दौरान पुलिस अधीक्षक श्री आशुतोष गुप्ता एवं जिला पंचायत सीईओ श्री कमल सोलंकी भी उपस्थित रहे।
सांची से मंगोलिया तक पहुंचने वाले ये पवित्र अवशेष भारत की बौद्ध विरासत और वैश्विक आध्यात्मिक संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेंगे।





