बूंद-बूंद पानी को तरस रहा ऐतिहासिक सांची, जिम्मेदार गहरी नींद मेंभीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहराया, दो दिन में एक बार भी नहीं हो पा रही नियमित जलापूर्ति, जनता में बढ़ रहा आक्रोश।

नसीम खान सांची
सांची,,,,ऐतिहासिक नगरी सांची इन दिनों भीषण पेयजल संकट से जूझ रही है। एक ओर तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, वहीं दूसरी ओर नगरवासियों को बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। पहले से ही दो दिन में एक बार होने वाली जलापूर्ति अब पूरी तरह अनिश्चित हो चुकी है, जिससे नगर में पेयजल को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद प्रशासन इस गंभीर समस्या के प्रति उदासीन बना हुआ है और पूरा नगर भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
जानकारी के अनुसार नगर में लंबे समय से जलसंकट बना हुआ है। लगातार बढ़ती गर्मी और गिरते जलस्तर के कारण अधिकांश बोरवेल प्रभावित हो चुके हैं। बताया जाता है कि नगर में लगभग 19 बोरवेल हैं, जिनमें से कई का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। वर्षों से बोर खुदाई और जल व्यवस्था के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद आज स्थिति यह है कि लोगों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
नगरवासियों का कहना है कि जलकर के नाम पर नियमित रूप से राशि वसूली जाती है, लेकिन बदले में अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। यही कारण है कि लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
गौरतलब है कि करोड़ों रुपये की लागत से जल संवर्धन योजना के अंतर्गत वर्ष 2020 में एक महत्वाकांक्षी पेयजल परियोजना शुरू की गई थी। वर्ष 2023 तक इसके पूर्ण होकर घर-घर जलापूर्ति का सपना दिखाया गया था, लेकिन वर्ष 2026 का आधा समय बीत जाने के बाद भी योजना का लाभ आम नागरिकों तक नहीं पहुंच पाया है। इस संबंध में नगर परिषद प्रशासन और निर्माण एजेंसी द्वारा कई बार शीघ्र कार्य पूर्ण होने के आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तक वे केवल आश्वासन ही साबित हुए हैं।
नगर में अवैध नल कनेक्शनों को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वैध कनेक्शनों की तुलना में अवैध कनेक्शनों की संख्या कहीं अधिक है, जिससे जल वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इसका सीधा असर नियमित जलकर जमा करने वाले उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
लोगों का यह भी आरोप है कि कुछ कर्मचारी लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं और राजनीतिक संरक्षण के चलते उनकी कार्यप्रणाली पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है। ऐसे में आम नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
मामले में नगर परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। वहीं जल व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे संबंधित अधिकारी ने भी फोन रिसीव नहीं किया।
इस संबंध में नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम ने बताया कि नगर के अधिकांश बोरवेलों में जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे उनमें लगी मोटरें भी प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में टैंकरों के माध्यम से आंशिक राहत देने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल ऐतिहासिक नगरी सांची गंभीर जलसंकट के दौर से गुजर रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भीषण गर्मी के बीच लोगों को पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, तब इस समस्या अथवा जनता मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?कहना मुश्किल है।
ऐतिहासिक नगरी की पहचान तभी सार्थक होगी, जब यहां के नागरिकों को सबसे पहले जीवन की मूलभूत आवश्यकता—पानी—सुलभ हो सके।

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