नसीमखान सांची
सांची,,, स्तूप पहाडी स्थित भैरव बाबा मंदिर का विवाद लंबे समय से चर्चित हो रहा है मामला भैरव बाबा मंदिर पहुंच मार्ग पर सीढी बनाने को लेकर तूल पकड़ता जा रहा है तो दूसरी ओर पुरातत्व विभाग की संरक्षित सीमा के दायरे में आने के कारण पुरातत्व विभाग एवं श्रद्धालु आमने सामने आ गए हैं श्रद्धालु सीढी बनाने की जिद पर अडे दिखाई दे रहे है तो दूसरी ओर पुरातत्व विभाग के नियमों के कारण विवाद बढता दिखाई दे रहा है ।
जानकारी के अनुसार नगर की स्तूप पहाड़ी जो पुरातत्व विभाग के अंतर्गत मानी जाती है परन्तु इसी पहाड़ी पर वर्षों प्राचीन भैरव देवालय के नाम से स्थित मंदिर है यहां भैरव बाबा की मूर्ति भी रखी हुई हैं इस मंदिर पर एक पुजारी भी पूजा अर्चना करने लगभग चालीस साल से है इस संबंध में हमारे प्रतिनिधि ने यहाँ स्थित पुजारी ओमप्रकाश मेहरा से बात की तो उन्होंने बताया कि इस पहाडी का नाम प्राचीन युग में श्री पर्वत हुआ करता था इसके बाद इसका नाम चेतन्गिरि पडा तब इस स्थान पर पांडवो ने पूजा अर्चना की थी यह भैरव स्थान सदियों पुराना है तथा इसका उल्लेख भी ग्रंथों में किया गया है इस स्थान पर लंबे अरसे से पूजा अर्चना की जाती रही है इस स्थान पर दोनों नवरात्रि व शिवरात्रि पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते है इसके साथ ही नवंबर माह में भेरव जयंती पर विशाल कार्यक्रम एवं भंडारा आयोजन किया जाता हैं इस आयोजन में क्षेत्रीय एवं दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं इस स्थान पर होली दीपावली दोज एवं छटपूजा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन किये जाते है इस स्थान पर आने के लिए मात्र पहाडी पर एक ही पतला रास्ता है इस स्थान पर पानी बिजली व्यवस्था का अभाव रहता है इस स्थान पर आने के लिए रास्ते पर सीढी बनाने के कारण पुरातत्व विभाग की आपत्ति के कारण मार्ग अवरुद्ध रहता है पहले भी इस स्थान पर पुरातत्व विभाग अधिकारियों द्वारा मंदिर से झंडे हटा दिये गए थे तथा मंदिर से छेड़छाड़ की गई थी तथा मंदिर का सामना फेंक दिया गया था तब बवाल मच गया था तब अधिकारियों द्वारा रातों रात झंडे लगा दिये गए थे तब विभाग के अधिकारियों को समझोता करना पडा था पुजारी ने बताया कि अब फिर सीढी निर्माण के कारण विवाद बढ रहा है जबकि इसके पूर्व पुरातत्व विभाग एवं जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम ने इस स्थान पर पहुंच मार्ग निर्माण करने का आश्वासन दिया था परन्तु वह निर्माण नहीं कराया गया अब जब श्रद्धालुओं द्वारा सीढी बनाने का बीडा उठाया तो फिर पुरातत्व विभाग द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई जिससे नायबतहसीलदार ललित सक्सेना एवं थाना प्रभारी पहुंच गए तब बडी संख्या में श्रद्धालुओं का जमावड़ा लग गया तथा मामला बढता देख एसडीएम मनीष शर्मा को सूचना दी गई मनीष शर्मा ने श्रद्धालुओं को आश्वासन दिया कि स्तूप प्रभारी एवं श्रद्धालु भोपाल पुरातत्व विभाग कार्यालय पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर हल निकाले इसके लिए बीता सोमवार दिन निश्चित किया गया परन्तु वहां नहीं पहुंचा जा सका ।पुजारी मेहरा ने बताया कि इस स्थान की व्यवस्था के लिए स्थानीय स्तर पर श्रद्धालुओं के बीच एक समीति का गठन किया गया था जिसके वर्तमान में अध्यक्ष गोरव राजपूत हैं तब भैरव बाबा मंदिर का विवाद खडा हो जाता है हालांकि इस स्थल की निगरानी के लिए पुरातत्व विभाग द्वारा एक सुरक्षा कर्मी को चौबीस घंटे के लिए तैनात किया हुआ है बहरहाल इस विवाद का हल पुरातत्व विभाग जिला प्रशासन एवं श्रद्धालुओं के बीच उलझकर रह गया है इस मामले में इनका कहना है।।
भैरव स्थान पर जो निर्माण किया जा रहा है वह पुरातत्व विभाग के नियमों के विरुद्ध है लोगों को समझाईश दी गई है तथा कहा गया है वह भोपाल जाकर अपनी समस्या विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखे जिससे उसका समाधान हो सके ।ललित सक्सेना नायबतहसीलदार सांची
इस मामले में स्तूप प्रभारी का पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया।





