नसीमखान सांची, रायसेन
रायसेन : महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश तथा प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से संचालित समर कैम्प 2026 कार्यक्रम के अंतर्गत कल भोपाल जिले की समस्त 61 सेक्टरों एवं 1,800 से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों पर आयोजित स्कूल रेडीनेस मेला-2 (SRM-2) का सफल समापन हुआ।
आज साँची परियोजना के अंतर्गत रायसेन शहरी-1 सेक्टर के वार्ड न. 13 की आंगनबाड़ी क्रमांक 4 में श्री अरुण विश्वकर्मा (IAS) कलेक्टर रायसेन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) श्री ब्रजेश जैन सर के द्वारा विजिट की गई साथ मेले में बच्चों द्वारा की गई गतिविधियों को देख कर स्कूल रेडीनेस मेले की सराहना की |
अधिकारियों के अनुसार 5–6 वर्ष आयु के हजारों बच्चों का पाँच विकास क्षेत्रों — भाषा, संख्या ज्ञान, संज्ञानात्मक क्षमता, शारीरिक विकास तथा सामाजिक-भावनात्मक कौशल — में पुनः आकलन किया गया तथा 26 मई को आयोजित पहले मेले की तुलना में उनकी प्रगति को व्यक्तिगत रिपोर्ट कार्ड में दर्ज कर अभिभावकों को सौंपा गया।
जिले भर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने एक माह तक चले माता सहभागिता कार्यक्रम के बाद बच्चों में स्पष्ट सुधार देखे जाने की जानकारी दी, जिसके दौरान माताओं को “एक खेल, एक कहानी, एक कविता” थीम पर प्रतिदिन WhatsApp वीडियो भेजकर घर पर सरल गतिविधियाँ कराने हेतु मार्गदर्शन दिया गया था।
मध्य भोपाल की एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने कहा, “आज जो देखने को मिला वह उल्लेखनीय था। जो बच्चे एक माह पहले रंग या अंक तक ठीक से पहचान नहीं पाते थे, वे आज आत्मविश्वास के साथ गतिविधियाँ पूरी कर रहे थे। अभिभावकों, विशेषकर माताओं ने इस बदलाव में असाधारण भूमिका निभाई है।”
मेले के दौरान चयनित केंद्रों का भ्रमण करने वाले वरिष्ठ WCD अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम में माताओं, सामुदायिक स्वयंसेवकों तथा स्थानीय विद्यालय प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता रही। एक जिला कार्यक्रम अधिकारी ने कहा, “यही वह सामुदायिक स्वामित्व है, जिसकी हमें अपेक्षा थी। माताएँ अब केवल जानकारी प्राप्त करने वाली नहीं रहीं — वे अपने बच्चों की शिक्षिका के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।”
प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि सभी केंद्रों से एकत्र किए गए रिपोर्ट कार्ड डेटा को अब समर कैम्प 2026 के समग्र परिणामों के आकलन हेतु एक संकलित जिला रिपोर्ट में तैयार किया जाएगा। प्रथम के स्टेट हेड श्री सज्जन सिंह शेखावत ने कहा, “मेला तो एक दृश्य उपलब्धि है, लेकिन वास्तविक सफलता पिछले एक माह में परिवारों द्वारा घर पर अपनाई गई दैनिक आदतों में निहित है।”
SRM-2 के पूर्ण होने के साथ ही सांची परियोजना में पदस्त प्रथम फाउंडेशन के डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स पर्सन राम दांगी ने बताया कि अब अगला ध्यान नए शैक्षणिक सत्र में कक्षा-1 में प्रवेश लेने वाले बच्चों के सहज स्थानांतरण पर केंद्रित किया जाएगा। कार्यक्रम से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर मध्यप्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की पहल प्रारंभ किए जाने की संभावना है।





