नसीमखान सांची
सांची,, लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की घरेलू अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। खाद्य सामग्री, सब्जियां, फल, रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल तथा किसानों के लिए खाद-बीज सहित लगभग सभी आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने से लोगों का मासिक बजट पूरी तरह असंतुलित हो गया है। सबसे अधिक परेशानी सीमित आय वाले मध्यम वर्गीय परिवारों को उठानी पड़ रही है, जिनके लिए घर का खर्च चलाना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है।
नगर के लोगों का कहना है कि बाजार में ऐसी बहुत कम वस्तुएं बची हैं जिनकी कीमतों में राहत दिखाई दे रही हो। दाल, तेल, आटा, चावल, सब्जियों और फलों की बढ़ती कीमतों के कारण रसोई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। वहीं घरेलू रसोई गैस के बढ़े दाम भी परिवारों की चिंता का कारण बने हुए हैं। दूसरी ओर पेट्रोल और डीजल की कीमतों का असर परिवहन लागत पर पड़ रहा है, जिससे अन्य वस्तुओं के दाम भी प्रभावित हो रहे हैं।
महंगाई का असर किसानों पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। खाद, बीज और कृषि कार्यों में उपयोग होने वाली अन्य आवश्यक सामग्री महंगी होने से खेती की लागत बढ़ गई है, जबकि आम उपभोक्ता भी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई महसूस कर रहा है।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि सरकार द्वारा गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनसे उन्हें कुछ राहत मिलती है। लेकिन सीमित आय वाले मध्यम वर्गीय परिवार इन योजनाओं के दायरे से बाहर रह जाते हैं। परिणामस्वरूप बढ़ती महंगाई का सबसे अधिक बोझ इसी वर्ग को उठाना पड़ रहा है।
लोगों का यह भी कहना है कि बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर प्रभावी निगरानी और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए नियमित निरीक्षण तथा मूल्य नियंत्रण संबंधी प्रयास और अधिक प्रभावी होने चाहिए, ताकि आम उपभोक्ता को महंगाई से कुछ राहत मिल सके।
महंगाई पर नियंत्रण के प्रभावी प्रयासों की अपेक्षा
बढ़ती महंगाई के बीच आम नागरिकों की अपेक्षा है कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर प्रभावी निगरानी रखी जाए तथा ऐसे कदम उठाए जाएं, जिनसे आम और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिल सके। महंगाई पर नियंत्रण केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक आवश्यकता भी बन चुकी है।रसोई का बढ़ता खर्च और घटती क्रयशक्ति आज आम परिवार की सबसे बड़ी चिंता बन गई है।
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